259 द्रोणपर्व जयद्रथवधपर्व अध्याय 113-116 Vyaas #mahabharat #महाभारत
Granthagangaa
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श्रीमन्महर्षि वेदव्यासप्रणीत महाभारत दैनंदिन वाचन-पाठ (हिन्दी अनुवाद)।
सभी का हार्दिक अभिनन्दन एवं मन:पूर्वक शुभेच्छायें।
असीम प्रभुकृपा एवं प. पू. स्वामीजी के अहैतुक कृपाशीर्वाद से श्रीअयोध्याधाम में गत दोन वर्ष पूर्व श्रीरामप्रतिष्ठा से प्रारंभ हुयें महासंक्रमण युग पर्व में, इस वर्ष मकर संक्रमण एवं षट्तिला एकादशी के पुण्य पावन पर्व पर श्रीमन्महर्षि वेदव्यासप्रणीत महाभारत दैनंदिन वाचन-पाठ (हिन्दी अनुवाद) का शुभारंभ बुधवार, षट्तिला एकादशी, अर्थात १४ जनवरी २०२६ से हुआ है ।
नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तमम्।
देवीं सरस्वतीं व्यासं ततो जयमुदीरयेत्।।
इति जयनामेतिहासोऽयम्
"जय" शब्द का अर्थ महाभारत नामक इतिहास ही है। इसमें सर्वत्र भगवान् श्रीकृष्ण और नररत्न अर्जुन का उल्लेख नर-नारायण अवतार के रूप में हुआ है।
महाभारत यह महाकाव्य आर्य-संस्कृति तथा भारतीय सनातन धर्म का एक लाख से अधिक श्लोकों का एक महान ग्रंथ तथा अमूल्य रत्नभांडार है, सर्वार्थसाधक तथा सर्वशास्त्रसंग्रह है। भगवान् श्रीकृष्ण के गुण-गौरव का मधुर गान है। इसके रचयिता महर्षि वेदव्यास साक्षात् भगवान् ही है। इसकी महिमा अपरंपार है। ऋषियों ने पञ्चं वेद मानकर महाभारत की सर्वोपरि महत्ता स्वीकार की है। संतश्रेष्ठ श्रीज्ञानेश्वर माऊली तो इसे विवेक तरू का उद्यान संबोधित करती है।
इसके श्रवण लाभ से हम कलियुग मेंं धर्माधिष्ठीत सत्कर्मशील भक्तिमय दिव्य जीवनव्यापन कर अपने जीवन को सफल, उन्नत बना सकते हैं।
श्रीकृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् । जय श्रीकृष्ण ॥
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