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जब अपने ही गलत हों तो क्या करें? | रिश्ता बचाएँ या सही का साथ दें? | अर्जुन की दुविधा | गीता 1.34-35

अपनी विरासत (Apni Virasat)

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जब अपने ही गलत हों तो क्या करें? | रिश्ता बचाएँ या सही का साथ दें? | अर्जुन की दुविधा | गीता 1.34-35

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अपनी विरासत (Apni Virasat)
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जब अपने ही गलत हों तो क्या करें? | रिश्ता बचाएँ या सही का साथ दें? | अर्जुन की दुविधा | गीता 1.34-35 जब अपने ही लोग गलत हों तो क्या करें? रिश्ता बचाएँ या सही का साथ दें? यह सवाल सिर्फ आज हमारे सामने नहीं आता। हजारों साल पहले कुरुक्षेत्र में अर्जुन भी इसी तरह की गहरी दुविधा में खड़े थे। सामने उनके गुरु, पितामह, मामा, श्वसुर और दूसरे संबंधी थे। अर्जुन के सामने युद्ध था, लेकिन उनके मन में सवाल था— “अपने ही लोगों के विरुद्ध कैसे लड़ूँ?” भगवद्गीता के अध्याय 1 के श्लोक 34–35 में अर्जुन अपनी इसी मनःस्थिति को व्यक्त करते हैं। लेकिन अर्जुन की यह दुविधा आज हमारे जीवन से भी कितनी जुड़ी हुई है? जब कोई अपना गलत हो... जब सच बोलने से रिश्ता खराब होने का डर हो... जब परिवार और सही-गलत के बीच चुनाव करना पड़े... तब हमें क्या करना चाहिए? इस वीडियो में हम अर्जुन की इसी समस्या को आज की जिंदगी से जोड़कर समझेंगे और जानेंगे कि गीता हमें रिश्तों, मोह और सही निर्णय के बारे में क्या सिखाती है। 🙏 श्रीमद्भगवद्गीता — सिर्फ पढ़ने के लिए नहीं, जीवन में समझने के लिए। अपनी विरासत — हमारी संस्कृति, हमारा ज्ञान। जय श्रीकृष्ण। 🙏 भगवद्गीता, भगवद गीता, गीता श्लोक, गीता अध्याय 1, गीता अध्याय 1 श्लोक 34 35, भगवद्गीता श्लोक 34 35, अर्जुन की दुविधा, अर्जुन का मोह, अर्जुन विषाद योग, जब अपने गलत हों, रिश्ते और सही गलत, रिश्ता बचाएं या सही का साथ दें, जीवन की समस्या और गीता, गीता से जीवन की सीख, गीता का ज्ञान, श्रीमद्भगवद्गीता, स्वामी रामसुखदास जी, गीता साधक संजीवनी, महाभारत, श्रीकृष्ण, अर्जुन, Krishna, Arjuna, Bhagavad Gita, Bhagavad Gita Chapter 1, Bhagavad Gita 1.34 1.35, Gita 1.34 1.35 #भगवद्गीता #श्रीमद्भगवद्गीता #अर्जुन #श्रीकृष्ण #गीता #गीता_ज्ञान #अर्जुनकीदुविधा #महाभारत #अपनीविरासत #BhagavadGita #Krishna