होठों पे तेरा नाम, हृदय में तेरा धाम 🌺कृष्णा... कृष्णा... कृष्णा... | वृंदावन भजन | 16 सितंबर 2026
The Infinite Rhythm by Sanghavl Jayesh
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होठों पे तेरा नाम, हृदय में तेरा धाम 🌺कृष्णा... कृष्णा... कृष्णा... | वृंदावन भजन | 16 सितंबर 2026
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🦚 होठों पे तेरा नाम, हृदय में तेरा धाम 🌺
कृष्णा... कृष्णा... कृष्णा... | वृंदावन भजन | 16 सितंबर 2026
🌺 होठों पे तेरा नाम 🌺
🦚 हृदय में तेरा धाम 🦚
मुखड़ा
होठों पे तेरा नाम, हृदय में तेरा धाम,
कृष्णा मेरे कृष्णा, तू ही मेरा प्राण।
तेरी मुरली की धुन में, खो जाए मेरा भान,
कृष्णा कृष्णा रे, तू ही मेरा भगवान।
कृष्णा नामधून
कृष्णा... कृष्णा... कृष्णा...
कृष्णा... कृष्णा... कृष्णा...
कृष्णा रे... कृष्णा रे...
कृष्णा रे... कृष्णा रे...
कृष्णा... कृष्णा...
कृष्णा... कृष्णा...
कृष्णा... कृष्णा... कृष्णा...
अंतरा १
जब मन मेरा थक जाता है,
तेरी याद सहारा दे,
सूनी-सूनी राहों में तू,
प्रेम का उजियारा दे।
तेरी मुरली सुनते ही मन,
हो जाता है शांत,
कृष्णा नाम जो ओठों पर आए,
भर दे मन में प्रेम अनंत।
मुखड़ा
होठों पे तेरा नाम, हृदय में तेरा धाम,
कृष्णा मेरे कृष्णा, तू ही मेरा प्राण।
तेरी मुरली की धुन में, खो जाए मेरा भान,
कृष्णा कृष्णा रे, तू ही मेरा भगवान।
अंतरा २
नहीं चाहिए धन-दौलत,
नहीं चाहिए जग का मान,
वृंदावन की धूल मिले बस,
चरणों में तेरा ध्यान।
प्रेम तेरा हृदय में बस जाए,
आँखों में तेरी छाया,
कृष्णा तेरे नाम में मैंने,
अपना सारा जग पाया।
कृष्णा नामधून
कृष्णा... कृष्णा... कृष्णा...
कृष्णा... कृष्णा... कृष्णा...
कृष्णा रे... कृष्णा रे...
कृष्णा... कृष्णा... कृष्णा...
मन मेरा तुझमें रम जाए,
जीवन तुझमें खो जाए,
कृष्णा... कृष्णा... कृष्णा...
तेरा नाम ही रह जाए।
अंतरा ३
यमुना के उस शांत किनारे,
वृंदावन मुस्काए,
कदंब की शीतल छाँव तले,
मन तुझमें खो जाए।
मोरपंख तेरे शीश सजे,
अधर पे मुरली प्यारी,
तेरे एक दर्शन की खातिर,
मन में उठे लगन न्यारी।
मुखड़ा
होठों पे तेरा नाम, हृदय में तेरा धाम,
कृष्णा मेरे कृष्णा, तू ही मेरा प्राण।
तेरी मुरली की धुन में, खो जाए मेरा भान,
कृष्णा कृष्णा रे, तू ही मेरा भगवान।
अंतरा ४
मंद हवा जब वृंदावन में,
तेरी खुशबू लाए,
फूलों की हर एक महक में,
तेरा नाम सुनाए।
जन्म-जन्म बस यही चाहत,
वृंदावन में रहना,
तेरी मुरली के स्वर में कृष्णा,
अपना जीवन कहना।
अंतिम समर्पण
साँसों में तेरा नाम रहे,
मन में तेरा ध्यान,
वृंदावन ही मेरा जग हो,
कृष्णा तू ही प्राण।
होठों पे तेरा नाम रहे,
हृदय में तेरा धाम,
कृष्णा मेरे कृष्णा,
तुझमें ही मेरा जीवन तमाम।
अंतिम नामधून
कृष्णा... कृष्णा... कृष्णा...
कृष्णा... कृष्णा... कृष्णा...
कृष्णा रे... कृष्णा रे...
कृष्णा रे... कृष्णा रे...
कृष्णा... कृष्णा... कृष्णा...
मन मेरा तुझमें रम जाए...
कृष्णा... कृष्णा... कृष्णा...
जीवन तुझमें खो जाए...
🌺 होठों पे तेरा नाम...
🦚 हृदय में तेरा धाम...
🌺 कृष्णा मेरे कृष्णा...
🦚 वृंदावन तेरा धाम...
रचना दिनांक: १६ सितंबर २०२६🦚 होठों पे तेरा नाम, हृदय में तेरा धाम 🌺
कृष्णा के मधुर नाम और वृंदावन की प्रेममयी अनुभूति को समर्पित यह भावपूर्ण भक्तिगीत मन को धीरे-धीरे कृष्ण-स्मरण में डुबोने का प्रयास है।
होठों पर कृष्णा का नाम, हृदय में कृष्णा का धाम और मन में वृंदावन की सतत ओढ़—यही इस गीत की आत्मा है।
यमुना का शांत किनारा, कदंब की शीतल छाँव, वृंदावन की पवित्र धूल, मोरपंख और कृष्णा की मधुर मुरली—इन सबके माध्यम से कृष्ण-प्रेम, शांति और समर्पण का भाव गीत में बुना गया है।
धन-दौलत और जग के मान से अधिक, मन को कृष्णा के नाम में शांति मिले, वृंदावन में प्रेम मिले और जीवन उनकी मुरली की मधुर धुन में खो जाए—यही इस भजन की प्रार्थना है।
इस गीत की विशेष नामधून है:
🦚 कृष्णा... कृष्णा... कृष्णा...
🌺 कृष्णा... कृष्णा... कृष्णा...
एक ही नाम, बार-बार—और उसी नाम में मन का धीरे-धीरे विलीन होना।
✍️ रचना: Sanghavi Jayesh – The Infinite Rhythm
📅 रचना दिनांक: १६ सितंबर २०२६
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