हिरण्यगर्भ सूक्तम् 10.121
Sanskrit sahitya evam sanskriti Dr. hari niwas
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हिरण्यगर्भ सूक्तम् 10.121
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ऋग्वेद में प्राकृतिक देवताओं की स्तुति के बाद जब ऋषि और मुनियों और विचारकों ने पाया की सृष्टि का नियंता तो इन इंद्र आदि देवताओं से भी पर कोई विशिष्ट सकती है तो ऐसे ही परम ब्रह्म परमात्मा की उपासना के लिए पुरुष सूक्त हिरण्यगर्भ सूक्त जैसे सूक्तों की रचना हुई