Jai Jai ho harju devta #kumounibhajan #harunathdevta #uttarakhandmusic
Ranjeet Dafouti
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Ranjeet Dafouti
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हिंदू धर्म में "कुमाऊँ के हरू नाथ" देवता को एक क्षेत्रीय देवता के रूप में पूजा जाता है। हरू नाथ या हरु देवता विशेष रूप से उत्तराखंड के कुमाऊँ क्षेत्र में पूजे जाते हैं। उन्हें एक वीर योद्धा और रक्षक के रूप में भी जाना जाता है।
कुमाऊँ के हरू नाथ देवता की कथा कई रूपों में सुनाई जाती है, और यह कथा क्षेत्र विशेष के अनुसार थोड़ी भिन्न हो सकती है। उनकी कथा वीरता, न्याय, और लोककल्याण से जुड़ी है। यहाँ एक प्रमुख कथा प्रस्तुत की जा रही है जो कुमाऊँ क्षेत्र में प्रचलित है:
हरू नाथ की कथा
प्राचीन समय में कुमाऊँ क्षेत्र में एक राजा का शासन था, जिसका नाम झलान चंद या जलरा चंद था। इस राजा की रानी बहुत ही सुंदर और धार्मिक प्रवृत्ति की थी, लेकिन राजा के मंत्री और कुछ दरबारी लोग उससे जलते थे। मंत्री और दरबारियों ने राजा को रानी के खिलाफ भड़काया, और राजा ने बिना किसी ठोस प्रमाण के रानी को कारावास में डाल दिया।
रानी उस समय गर्भवती थी, और उसने कारावास में ही एक पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम हरू रखा गया। जब राजा को रानी और उसके पुत्र की निर्दोषता का पता चला, तब उसे अपनी गलती का एहसास हुआ, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। रानी और उसका पुत्र दोनों स्वर्ग सिधार चुके थे।
कहते हैं कि हरू ने अपनी मृत्यु के बाद भी अपने गांव और लोगों की रक्षा के लिए एक देवता के रूप में अवतार लिया। वह गांववासियों की रक्षा करते हैं और उनके जीवन में शांति और समृद्धि लाते हैं। इसलिए, हरू नाथ देवता को वीर योद्धा और न्याय के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है।
कुमाऊँ क्षेत्र के लोग हरू नाथ को अपने गांव के रक्षक और संकटमोचक के रूप में मानते हैं। उनके मंदिर अक्सर गांव के ऊँचे स्थानों पर होते हैं, जहां से वह पूरे गांव की निगरानी करते हैं और उनकी रक्षा करते हैं।
हरू नाथ की पूजा से लोग अपने जीवन में आने वाली समस्याओं और कठिनाइयों से मुक्ति पाते हैं।
दूसरी कथा: हरू नाथ और अयालगढ़ की राजकुमारी
कई वर्षों पहले, कुमाऊँ के अयालगढ़ नामक राज्य में एक अत्याचारी राजा का शासन था। राजा अपनी ताकत के कारण प्रजा पर अत्याचार करता था और उसकी एकमात्र पुत्री, राजकुमारी कलिंगा, बहुत सुंदर और धार्मिक थी। राजा चाहता था कि उसकी बेटी की शादी किसी बड़े राज्य के राजा या योद्धा से हो, जिससे उसका वर्चस्व बढ़ सके। लेकिन राजकुमारी कलिंगा को यह बात पसंद नहीं थी क्योंकि वह एक विनम्र और सरल व्यक्ति से शादी करना चाहती थी।
उसी समय, हरू नाथ (हरु देवता) कुमाऊँ के अन्य इलाकों में अपने पराक्रम और न्यायप्रियता के लिए जाने जाते थे। उनकी वीरता और साहस की चर्चाएं दूर-दूर तक फैली थीं। एक दिन, राजकुमारी कलिंगा ने हरू नाथ का नाम सुना और उन्हें अपना रक्षक और जीवन साथी मानने लगी।
राजा ने अपनी बेटी की इच्छा के खिलाफ जाकर उसकी शादी एक शक्तिशाली राजा के साथ तय कर दी। लेकिन राजकुमारी कलिंगा ने हरू नाथ से प्रार्थना की कि वह उसकी रक्षा करें और उसे इस अनुचित विवाह से बचाएं। हरू नाथ ने राजकुमारी की पुकार सुनी और उसे इस संकट से बचाने के लिए अपने दिव्य रूप में अवतरित हुए।
हरू नाथ ने अयालगढ़ के राजा के महल में प्रवेश किया और उसकी सेना से युद्ध किया। इस लड़ाई में हरू नाथ ने अपनी वीरता का परिचय देते हुए राजा को पराजित किया और राजकुमारी को अत्याचारी विवाह से बचाया। इसके बाद, हरू नाथ ने राजकुमारी कलिंगा से विवाह किया और उसे एक सुखी और सुरक्षित जीवन प्रदान किया।
इस कथा के अनुसार, हरू नाथ को संकट में फंसी महिलाओं के रक्षक और न्याय के देवता के रूप में माना जाता है। लोग आज भी उन्हें अपने गांवों और परिवार की रक्षा के लिए पूजते हैं, विशेषकर तब जब किसी पर अत्याचार हो रहा हो या किसी को अन्याय का सामना करना पड़ रहा हो। इस प्रकार, हरू नाथ की पूजा से लोग न केवल शारीरिक सुरक्षा बल्कि मानसिक शांति और न्याय की भी आशा करते हैं।
तीसरी कथा: हरू नाथ का चमत्कारी जन्म और न्याय
इस कथा के अनुसार, हरू नाथ का जन्म एक चमत्कारी घटना के रूप में होता है। एक समय की बात है, कुमाऊँ के किसी राज्य में राजा का शासन था, जिसकी रानी लंबे समय से संतान सुख से वंचित थी। दोनों पति-पत्नी ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की और उनसे एक पुत्र की प्राप्ति की प्रार्थना की। भगवान शिव ने उनकी प्रार्थना सुन ली और आशीर्वाद दिया कि रानी एक दिव्य संतान को जन्म देगी।
कुछ समय बाद, रानी ने एक पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम हरू रखा गया। इस बालक के जन्म के साथ ही पूरे राज्य में सुख-समृद्धि और शांति फैल गई। हरू नाथ बचपन से ही असाधारण शक्तियों से संपन्न थे। उनके भीतर अद्भुत साहस, ज्ञान, और न्याय की भावना थी। कहते हैं कि वह अन्य बच्चों से अलग दिखते थे और उनकी आभा दिव्य थी।
जैसे-जैसे हरू नाथ बड़े होते गए, उन्होंने कई चमत्कार किए और अपने राज्य में अन्याय, अत्याचार, और बुरी शक्तियों का नाश किया। एक बार उनके राज्य में एक अत्याचारी और क्रूर जमींदार था, जो गरीबों और किसानों का शोषण करता था। जमींदार ने एक निर्दोष किसान को बिना कारण के सजा दी और उसके परिवार को सताया। जब यह बात हरू नाथ तक पहुँची, तो उन्होंने जमींदार को न्याय का पाठ सिखाने का निश्चय किया।
हरू नाथ ने अपने चमत्कारी रूप से उस जमींदार का सामना किया और उसे उसकी गलतियों का एहसास कराया। जमींदार ने अपने पापों की माफी मांगी और हरू नाथ ने उसे जीवन का सही मार्ग दिखाया। इस घटना के बाद, हरू नाथ का राज्य और भी सुखी और शांतिपूर्ण हो गया, और लोग उन्हें अपने नायक और न्यायप्रिय देवता के रूप में मानने लगे।
Jai Jai ho harju devta #kumounibhajan #harunathdevta #uttarakhandmusic
Singer : Ranjeet Singh Dafouti | Music : Ranjeet Singh | Recordist : Tanuj Bisht | Lyrice : Ranjeet Singh Dafouti | Artist : Bhatt Ji