स्थाई / मुखड़ा)तू जो रूठा, हर ख़ुशी रूठ गई,साँसों की डोर#songs #hindi
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स्थाई / मुखड़ा)तू जो रूठा, हर ख़ुशी रूठ गई,साँसों की डोर#songs #hindi
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स्थाई / मुखड़ा)
तू जो रूठा, हर ख़ुशी रूठ गई,
साँसों की डोरी थी, जैसे टूट गई।
अब तन्हाइयों से ही रिश्ता रहा,
तेरे बिन ये सफ़र कितना सूना लगा...
तू कहाँ खो गया, ढूँढूँ मैं किस डगर,
आँखों में आ गए बस गम के समंदर!
(अंतरा १)
तेरी यादों के साये अभी साथ हैं,
खाली-खाली सी मेरी ये सब रात हैं।
वो हँसना-हँसाना, वो बातें तेरी,
अब बस दर्द बन के चुभती हैं मेरी।
किससे कहूँ मैं दिल का ये हाल मेरे,
हम तो बुझ गए बन के जैसे सवेरे!
(अंतरा २)
तस्वीर तेरी सीने से मैं लगाऊँ,
रोते-रोते मैं खुद को यही समझाऊँ—
तू लौट के शायद कभी आएगा,
मेरा टूटा हुआ दिल फिर से गाएगा।
पर हवाएँ भी अब तो ये कहती नहीं,
बिछड़े हुए लोग कभी मिलते कहीं!
(आउट्रो / अंत)
तू जो रूठा, हर ख़ुशी रूठ गई...
साँसों की डोरी थी, जैसे टूट गई...
अब बस तन्हाई है... और मैं हूँ यहाँ...
(म्यूजिक फेड आउट...)
सुझाव:
इस गाने को गाते समय आप गिटार (Guitar) या पियानो (Piano) का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिससे इसका दर्द और गहराई से उभर कर आए। बताइए, गाना आपको कैसा लगा?