Santoshi Mata Mandir Muzaffarpur संतोषी माता मंदिर मुजफ्फरपुर,क्यो हुआ 1975 में ही मंदिर का निर्माण?
Stories With Kanhaiya
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Santoshi Mata Mandir Muzaffarpur संतोषी माता मंदिर मुजफ्फरपुर,क्यो हुआ 1975 में ही मंदिर का निर्माण?
नवरात्र के छठे दिन का vlog हैं समय के अभाव के कारण ये vlog विलम्ब से अपने youtube चैनल पर अपलोड किया गया है।
इस vlog के माध्यम से से जितनी भी जानकारी आप तक दिया गया है या हम जानकारी देने का एक छोटी सी कोशिश किया हूँ ।ये सारी जानकारी माँ संतोषी माता मंदिर के अधिकारिता वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।
जय माता दी।
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मुजफ्फरपुर। पुरानी धर्मशाला चौक स्थित मां महामाया स्थान संतोषी माता मंदिर की काफी प्रसिद्धि है। मुजफ्फरपुर ही नहीं, पूरे उत्तर बिहार व सुदूर क्षेत्रों से लोग यहां मां के दर्शन व पूजा-अर्चना के लिए आते हैं। शारदीय व वासंतिक नवरात्र सहित विविध अवसरों पर यहां भक्तों की काफी भीड़ रहती है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी हर मुराद पूरी होती है।
इतिहास
मंदिर की स्थापना के संबंध में लोगों का कहना है कि यहां वर्षो पहले एक छोटा-सा हॉल्ट हुआ करता था। प्राय: साधु-सन्यासी आते रहते थे। अंग्रेजों ने उन्हें यहां रहने के लिए जमीन दी थी। वे लोग इस जगह साधना करते थे। महामाया स्थान का एक छोटा-सा गहबर था। बाहर हनुमान जी एक प्रतिमा स्थापित थी। बाद में लोगों ने शिव मंदिर की स्थापना की। पूजा के लिए आसपास के लोगों का आना-जाना शुरू हो गया। शीघ्र ही मंदिर की प्रसिद्धि सुदूर क्षेत्रों में फैल गई। दूरदराज के लोग भी पूजा के लिए आने लगे। 1975 में यहां संतोषी माता का मंदिर बना। फिर धीरे-धीरे अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित हुई।
विशेषता
मंदिर परिसर में एक बड़ा-सा नीम का पेड़ है। इस संबंध में स्थानीय समाजसेवी भोला चौधरी बताते हैं कि हिन्दू परंपरा के अनुसार, जहां भगवती स्थान हो, वहां नीम का पेड़ होता है। सावन, महाशिवरात्रि, अनंत पूजा, जन्माष्टमी, रामनवमी व नवरात्र सहित विविध अवसरों पर यहां भक्तों की भीड़ उमड़ती है। शुक्रवार को तो भीड़ देखते बनती है। शारदीय नवरात्र में मूर्ति स्थापित कर वृहत रूप से पूजा भी की जाती है। जो लोगों के आकर्षण का केंद्र होता है। दर्शन के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं।
मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ ही सालों भर मांगलिक कार्य भी होते हैं। दूरदराज से लोग यहां पहुंचते हैं। मां भगवती के आशीर्वाद से रिश्तों की गांठ जोड़ी जाती है। सब मंगलमय होता है।
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