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मंदिर जाने वाले ही सबसे ज़्यादा झूठे क्यों? | Osho

Osho Tales Hindi

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मंदिर जाने वाले ही सबसे ज़्यादा झूठे क्यों? | Osho

17 просмотров · 4 ч назад
Osho Tales Hindi
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मंदिर जाने वाले ही सबसे ज़्यादा झूठे क्यों हैं? एक चर्च में एक फकीर ने पूछा — बाइबिल में ल्यूक का उनहत्तरवां अध्याय किस-किस ने पढ़ा है? पूरी भीड़ ने हाथ उठा दिया, सिर्फ एक आदमी को छोड़कर। फिर फकीर हंसने लगा, क्योंकि बाइबिल में ल्यूक का उनहत्तरवां अध्याय है ही नहीं! . और जिस एक आदमी ने हाथ नहीं उठाया था, वो भी सच बोलने वाला नहीं निकला… वो तो बस कम सुनने वाला था, और रोज़ उसी अध्याय का पाठ करता था जो है ही नहीं। यहीं से ओशो खोलते हैं हमारी सबसे बड़ी सच्चाई — हमारा सारा व्यक्तित्व झूठ पर खड़ा है। भीतर जो है, वो हम दिखाते नहीं। लंदन के उस फोटोग्राफर की कहानी सुनिएगा, जो तीन तरह की तस्वीरें खींचता था — जैसी तुम हो, जैसी तुम अपने को समझते हो, और जैसी तुम चाहते हो कि लोग तुम्हें समझें। आज तक कोई पहली वाली तस्वीर उतरवाने नहीं आया।! वो बड़े पादरी भी याद रहेंगे, जो शेक्सपीयर का नाटक देखने के लिए थियेटर के पीछे के दरवाज़े से आना चाहते थे — सामने के दरवाज़े से आते तो लोग क्या कहते!! आखिर में ओशो देते हैं सत्य की खोज का पहला सूत्र — निष्पक्ष चित्त। जो आदमी पहले से ही किसी पक्ष में खड़ा है, किसी मत, किसी धर्म की तरफदारी में बंधा है, वो सत्य को कभी नहीं पा सकता। सत्य किसी का पक्ष नहीं लेता। " वीडियो आखिर तक देखिएगा, बात सिर्फ मंदिर जाने वालों की नहीं है… बात हम सबकी है। अच्छा लगे तो लाइक-शेयर ज़रूर कीजिएगा, और चैनल सब्सक्राइब करना मत भूलिएगा। #ओशो #ओशो_हिंदी #ओशो_प्रवचन #सत्य_की_खोज #झूठा_व्यक्तित्व #निष्पक्षता #मंदिर #धर्म #आध्यात्मिकता #हिंदी_प्रवचन #ओशो_विचार