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Amitabh Bachchan से सुनें Madhushala की सबसे अच्छी पंक्तियां | Big B | Bachchan Poems | Sahitya Tak

Sahitya Tak

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Amitabh Bachchan से सुनें Madhushala की सबसे अच्छी पंक्तियां | Big B | Bachchan Poems | Sahitya Tak

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#Madhushala #HarivanshRaiBachchan #AmitabhBachchan #BachchanPoem #MadhushalaVideo #Aajtak #SahityaTak मदिरालय जाने को घर से चलता है पीनेवला, 'किस पथ से जाऊं?' असमंजस में है वह भोलाभाला, अलग-अलग पथ बतलाते सब पर मैं यह बतलाता हूं - 'राह पकड़ तू एक चला चल, पा जाएगा मधुशाला'.... बने पुजारी प्रेमी साकी, गंगाजल पावन हाला, रहे फेरता अविरत गति से मधु के प्यालों की माला' 'और लिये जा, और पीये जा', इसी मंत्र का जाप करे' मैं शिव की प्रतिमा बन बैठूं, मंदिर हो यह मधुशाला.... बजी न मंदिर में घड़ियाली, चढ़ी न प्रतिमा पर माला, बैठा अपने भवन मुअज्ज़िन देकर मस्जिद में ताला, लुटे ख़जाने नरपितयों के गिरीं गढ़ों की दीवारें, रहें मुबारक पीनेवाले, खुली रहे यह मधुशाला... एक बरस में, एक बार ही जगती होली की ज्वाला, एक बार ही लगती बाज़ी, जलती दीपों की माला, दुनियावालों, किन्तु, किसी दिन आ मदिरालय में देखो, दिन को होली, रात दिवाली, रोज़ मनाती मधुशाला.... यम आयेगा साकी बनकर साथ लिए काली हाला, पी न होश में फिर आएगा सुरा-विसुध यह मतवाला, यह अंतिम बेहोशी, अंतिम साकी, अंतिम प्याला है, पथिक, प्यार से पीना इसको फिर न मिलेगी मधुशाला... मेरे अधरों पर हो अंतिम वस्तु न तुलसीदल प्याला मेरी जीव्हा पर हो अंतिम वस्तु न गंगाजल हाला, मेरे शव के पीछे चलने वालों याद इसे रखना राम नाम है सत्य न कहना, कहना सच्ची मधुशाला... मेरे शव पर वह रोये, हो जिसके आंसू में हाला आह भरे वो, जो हो सुरिभत मदिरा पी कर मतवाला, दे मुझको वो कान्धा जिनके पग मद डगमग होते हों और जलूं उस ठौर जहां पर कभी रही हो मधुशाला... और चिता पर जाये उंढेला पात्र न घ्रित का, पर प्याला कंठ बंधे अंगूर लता में मध्य न जल हो, पर हाला, प्राण प्रिये यदि श्राद्ध करो तुम मेरा तो ऐसे करना पीने वालों को बुलवा कऱ खुलवा देना मधुशाला...पिता हरिवंशराय बच्चन को याद करते हुए अमिताभ बच्चन ने न केवल मधुशाला की यह चुनिंदा पंक्तियां सुनाईं, बल्कि यह भी बताया कि हालावाद के अग्रणी लेखक बच्चन तो शराब पीते ही नहीं थे, और अपनी बात को उन्होंने अपनी इन पंक्तियों में व्यक्त किया था- स्वयं नहीं पीता, औरों को, किन्तु पिला देता हाला, स्वयं नहीं छूता, औरों को, पर पकड़ा देता प्याला, पर उपदेश कुशल बहुतेरों से मैंने यह सीखा है, स्वयं नहीं जाता, औरों को पहुंचा देता मधुशाला...कोरोना से मचे कोहाराम के बीच हालावाद के यशस्वी कवि हरिवंशराय बच्चन की ये पंक्तियां और भी मौजूं है. खासकर तब तो और भी जब इसे सदी के महानायक और बच्चन जी के बेटे अमिताभ बच्चन ने अपनी आवाज दी हो. बिग बी ने इसे आज तक के मंच पर मधुशाला की जो चुनिंदा पंक्तियां पढ़ीं, वे साहित्य तक पर खासतौर से आप के लिए. ............................ About the Channel Sahitya Tak आपके पास शब्दों की दुनिया की हर धड़कन के साथ I शब्द जब बनता है साहित्य I वाक्य करते हैं सरगोशियां I जब बन जाती हैं किताबें, रच जाती हैं कविताएं, कहानियां, व्यंग्य, निबंध, लेख, किस्से व उपन्यास I Sahitya Tak अपने दर्शकों के लिये लेकर आ रहा साहित्य के क्षेत्र की हर हलचल I सूरदास, कबीर, तुलसी, भारतेंदु, प्रेमचंद, प्रसाद, निराला, दिनकर, महादेवी से लेकर आज तक सृजित हर उस शब्द की खबर, हर उस सृजन का लेखा, जिससे बन रहा हमारा साहित्य, गढ़ा जा रहा इतिहास, बन रहा हमारा वर्तमान व समाज I साहित्य, सृजन, शब्द, साहित्यकार व साहित्यिक हलचलों से लबरेज दिलचस्प चैनल Sahitya Tak. तुरंत सब्स्क्राइब करें व सुनें दादी मां के किस्से कहानियां ही नहीं, आज के किस्सागो की कहानियां, कविताएं, शेरो-शायरी, ग़ज़ल, कव्वाली, और भी बहुत कुछ I Sahitya Tak - Welcome to the rich world of Hindi Literature. From books to stories to poetry, essays, novels and more, Sahitya Tak is a melting pot where you will keep abreast of what's the latest in the field of literature. We also delve into our history and culture as we explore literary gems of yesteryears from Surdas, Kabir, Tulsi, Bhartendu, Premchand, Prasad, Nirala, Dinkar, Mahadevi, etc. To know more about how literature shapes our society and reflects our culture subscribe to Sahitya Tak for enriching stories, poems, shayari, ghazals, kawali and much more. Subscribe Sahitya Tak now. Follow us on Facebook:   / sahityatakoffical