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मैं हर समय इतना बोलती क्यों रहती हूँ? चुप क्यों नहीं बैठ पाती? || आचार्य प्रशांत (2024)

शक्ति

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मैं हर समय इतना बोलती क्यों रहती हूँ? चुप क्यों नहीं बैठ पाती? || आचार्य प्रशांत (2024)

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🧔🏻‍♂️ आचार्य प्रशांत से मिलना चाहते हैं? लाइव सत्रों का हिस्सा बनें: https://acharyaprashant.org/hi/enquir... ⚡ आचार्य प्रशांत से जुड़ी नियमित जानकारी चाहते हैं? व्हाट्सएप चैनल से जुड़े: https://whatsapp.com/channel/0029Va6Z... 📚 आचार्य प्रशांत की पुस्तकें पढ़ना चाहते हैं? फ्री डिलीवरी पाएँ: https://acharyaprashant.org/hi/books?... 🔥 आचार्य प्रशांत के काम को गति देना चाहते हैं? योगदान करें, कर्तव्य निभाएँ: https://acharyaprashant.org/hi/contri... 🏋🏻 आचार्य प्रशांत के साथ काम करना चाहते हैं? संस्था में नियुक्ति के लिए आवेदन भेजें: https://acharyaprashant.org/hi/hiring... ~~~~~ वीडियो जानकारी: 07.04.2024, संत सरिता, ग्रेटर नॉएडा विवरण: इस वीडियो में आचार्य जी ने मौन और बोलने की प्रवृत्ति पर गहराई से चर्चा की है। उन्होंने बताया कि आजकल लोग बोलने के लिए क्यों उतावले रहते हैं और मौन से क्यों घबराते हैं। आचार्य जी ने यह स्पष्ट किया कि बोलना एक प्रकार का कर्म है, जो अक्सर हमारी आंतरिक बेचैनी और अहंकार से जुड़ा होता है। उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि कैसे लोग बाहरी शोर के माध्यम से अपने भीतर के शोर को छुपाने की कोशिश करते हैं। आचार्य जी ने यह भी बताया कि अच्छे रिश्ते वे होते हैं, जिनमें लोग बिना किसी असहजता के मौन बैठ सकते हैं। आचार्य जी ने यह भी कहा कि मौन में सच्चाई और आत्मा का अनुभव होता है, और जो लोग मौन में असहज होते हैं, वे अपनी आंतरिक समस्याओं से भाग रहे होते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि मौन में बैठना और सुनना एक महत्वपूर्ण गुण है, जो अच्छे इंसान और अच्छे रिश्तों की पहचान है। प्रसंग: ~ मौन में कितनी शक्ति है? ~ शांत रहना कितना ज़रूरी है? ~ अपने लिए समय निकालना क्यों आवश्यक है? ~ हम कुछ भी किस लिए करते हैं? ~ ज़्यादा बोलना अच्छा नहीं होता? कबीरा यह गत अटपटी, झटपट लखि न जाय। जब मन की खटपट मिटे, अधर भया ठहराय ॥ ~ संत कबीर संगीत: मिलिंद दाते ~~~~~