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राजा जनक के 3 प्रश्न और अष्टावक्र का प्रथम उपदेश | मुक्ति और वैराग्य का मार्ग | अष्टावक्र गीता कथा

Rishi Vani

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राजा जनक के 3 प्रश्न और अष्टावक्र का प्रथम उपदेश | मुक्ति और वैराग्य का मार्ग | अष्टावक्र गीता कथा

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Rishi Vani
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राजा जनक के मन में यह गहरी जिज्ञासा उठी कि इस असार संसार के बंधनों से मुक्ति कैसे प्राप्त हो सकती है? जब उन्हें परम ज्ञानी महर्षि अष्टावक्र मिले, तो राजा जनक ने उनके सामने 3 मुख्य प्रश्न रखे: ज्ञान किस प्रकार प्राप्त होता है? मुक्ति कैसे मिलती है? सच्चा वैराग्य क्या है? महर्षि अष्टावक्र ने उत्तर देते हुए कहा कि यदि मुक्ति चाहते हो, तो पाँचों इंद्रियों के विषयों (शब्द, स्पर्श, रूप, रस, गंध) को विष के समान त्याग दो और क्षमा, सरलता, दया, संतोष तथा सत्य रूपी अमृत का सेवन करो। आत्म-साक्षात्कार और अद्वैत वेदांत के इस कालजयी संवाद को पूरा सुनें और जानें कि कैसे अष्टावक्रजी ने राजा जनक के मन का भ्रम दूर किया।