🚩राम कैसे बने ओरछा के राजा राम सरकार
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🚩राम कैसे बने ओरछा के राजा राम सरकार
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🚩 अयोध्या से राम कैसे ओरछा की रानी की ममता और हठ के कारण ओरछा पधारे।
और कैसे उनके लिए बनाए मंदिर में स्थापना न होकर दूसरे जगह स्थापित हो गये।
क्या शर्त रखी थी राम जी ने?
पुष्य नक्षत्र का क्या है महत्व?
यात्रियों कृपया ध्यान दें... SWAAR Express का अगला पड़ाव है—ओरछा। वह पावन धाम... जहाँ अयोध्या के राम, राजा राम सरकार बनकर विराजते हैं।”
सरयू की लहरों से पूछो, किसका नाम पुकारा था...
एक रानी ने राम के खातिर, अपना सब कुछ वारा था...
महलों की वो रानी थी, पर मन में साध्वी जैसी थी,
आँखों में बस राम बसे थे, साँस-साँस में राम ही थे...
हे राम... मेरे राम... मेरे प्राणों के आधार...
तुम बिन सूना मन का आँगन, तुम बिन सूना संसार...🚩
राजा राम सरकार की प्रसिद्ध कथा — संक्षेप में
ओरछा के राजा मधुकर शाह की रानी गणेशकुँवरी भगवान राम की अनन्य भक्त थीं। लोकपरंपरा के अनुसार, राजा कृष्ण भक्त थे और रानी राम भक्त। एक बार दोनों के बीच यह प्रसंग आया कि रानी अयोध्या जाकर भगवान राम को ओरछा लाने की प्रार्थना करें।
रानी ने कठिन भक्ति और तपस्या की। कथा के अनुसार भगवान राम उनके सामने प्रकट हुए और ओरछा चलने की बात स्वीकार की, लेकिन एक शर्त रखी—जहाँ उन्हें पहली बार विराजमान किया जाएगा, वहीं वे स्थायी रूप से रहेंगे।
रानी भगवान राम की मूर्ति लेकर ओरछा लौटीं और उसे अपने महल में स्थापित कर दिया। बाद में जब मूर्ति को मंदिर में ले जाने का प्रयास हुआ, तो वह वहाँ से हिली ही नहीं। तब लोगों ने इसे भगवान राम की इच्छा माना।
इसी लोकविश्वास से जुड़ी परंपरा के कारण ओरछा में भगवान राम को "राजा राम सरकार" के रूप में पूजा जाता है—और मंदिर में उन्हें राजा के रूप में सम्मान दिया जाता है।
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