हक्कनाम साहेब,पाकनाम साहेब,प्रगटनाम साहेब,धीरजनाम साहेब l समाधि स्थल कवर्धा कबीरधाम
Kabir Ki Mahima
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हक्कनाम साहेब,पाकनाम साहेब,प्रगटनाम साहेब,धीरजनाम साहेब l समाधि स्थल कवर्धा कबीरधाम
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कबीर पंथ के अष्टम गुरु वंशप्रतापाचार्य पंथ श्री हक्कनाम साहेब प्रागट्य वि. सं.1835 में ग्राम सिंगोड़ी धाम (छिंदवाड़ा)। में हुआ l वही आपको वि. सं. 1853 गद्दी का कार्यभार सौंपा गया l धर्म प्रचारार्य आपने अपनी सम्पूर्ण जमात के साथ अनेक प्रान्तों का भ्रमण किया और अंत में सकरी नदी के तट पर डेरा डाला निर्जन स्थान पर अब नित्य प्रति सतसंग भजन ध्यान साधना व पूजा पाठ होने लगा l आपका प्रभाव इतना गहरा और व्यापक था कि थोडे ही समय में उस विराज जगह ने एक नगर का रूप धारण कर लिया l
श्रद्धा पूर्वक उस नई बस्ती को सदगुरु के पवित्र नाम पर
कबीर धाम के नाम से पुकारा जाने लगा l सदा अपने स्वरूप में लिन रहने वाले पूज्यपाद पंथ हक्कनाम साहेब जीवन भर आनन्द प्रसाद बांटते हुए वि. सं. 1890 में नश्वर चोला छोड़कर आनन्द रुप में ली हुए l
कबीर पंथ के नवम गुरु वंशप्रतापाचार्य पंथ श्री पाकनाम साहेब का प्रागट्य कबीर धाम में वि. सं.1855 में हुआ l आपको वि.सं 1890 गुरु पिता के लोक गमन के उपरांत गद्दी की जिम्मेदारी हाथों में लेना पड़ी l आपने कबीर पंथानुयायियो के लिये अनेक नियम भी बनाएl
सतत् धर्म का प्रचार व पंथ विकास करते हुए आपने कबीरधाम में ही वि. सं.1992 में लोक वास किया l
कबीर पंथ की गरिमापूर्ण परंपरा के दसवें गुरु वंश प्रतापाचार्य
पंथ श्री प्रगट नाम साहेब का प्रागट्य वि. सं.1875 में कबीर धाम में हुआ था l आपके ऊपर गद्दी की जिम्मेदारी वि. सं. 1912 में आई l आपने वि. सं.1939 इस नश्वर संसार को छोड़ दिया l
कबीर पंथ के ग्यारहवें वंशगुरु पंथ श्री धीरज नाम साहेब का प्रागट्य वि. सं. 1899 में कबीर धाम में हुआ l कबीर धाम में ही आपके गृह कबीर पंथ के भावी वंशाचार्य के रूप में
पंथ श्री उग्र नाम साहेब का प्रागट्य हुआ l आपके रहते आपके गुरु पिता पंथ श्री प्रगटनाम साहेब गद्दी पर विराजमान रहे और आप उनसे पूर्व वि. सं. 1937 में ही उस अखंड धाम सत्य लोक को
प्रयाण कर गये l इस प्रकार कबीर पंथ में आपके नाम की गद्दी नहीं
चली l