Divine Murli | Date - 16-10-2026
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16-10-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा"' मधुबन
मुरली सार:- “ मीठे बच्चे - इस पुरानी दुनिया से बेहद के वैरागी बनो क्योंकि बाप तुम्हारे लिए नया स्वर्ग रूपी घर बना रहे हैं'' ”
प्रश्न:- इस अविनाशी रूद्र यज्ञ में किन-किन बातों के कारण ही विघ्न पड़ते हैं?
उत्तर:- यह शिवबाबा का रचा हुआ अविनाशी रूद्र यज्ञ है, इसमें तुम मनुष्य से देवता बनने के लिए पवित्र बनते हो, भक्ति आदि छोड़ते हो इस कारण विघ्न पड़ते हैं। लोग कहते हैं - शान्ति हो, विनाश न हो और बाप ने यह रूद्र ज्ञान यज्ञ रचा ही है पुरानी दुनिया के विनाश के लिए। इसके बाद ही शान्ति की दुनिया आयेगी।
गीत:-
वरदान:- बुद्धि रूपी पांव द्वारा इस पांच तत्वों की आकर्षण से परे रहने वाले फरिश्ता स्वरूप भव फरिश्तों को सदा प्रकाश की काया दिखाते हैं। प्रकाश की काया वाले इस देह की स्मृति से भी परे रहते हैं। उनके बुद्धि रूपी पांव इस पांच तत्व की आकर्षण से ऊंचे अर्थात् परे होते हैं। ऐसे फरिश्तों को माया व कोई भी मायावी टच नहीं कर सकते। लेकिन यह तब होगा जब कभी किसी के अधीन नहीं होंगे। शरीर के भी अधिकारी बनकर चलना, माया के भी अधिकारी बनना, लौकिक वा अलौकिक संबंध की भी अधीनता में नहीं आना।
स्लोगन:- शरीर को देखने की आदत है तो लाइट का शरीर देखो, लाइट रूप में स्थित रहो।
Om Shanti