Madmaheshwar Yatra : The Second Kedar : Hidden Heaven of Uttarakhand स्वर्ग की ओर एक दिव्य यात्रा 🙌
Vairagikiyatra
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Madmaheshwar Yatra : The Second Kedar : Hidden Heaven of Uttarakhand स्वर्ग की ओर एक दिव्य यात्रा 🙌
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Madmaheshwar Yatra : The Second Kedar : Hidden Heaven of Uttarakhand स्वर्ग की ओर एक दिव्य यात्रा 🙌
मधमहेश्वर (मदमाहेश्वर) उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित पंच केदार में से द्वितीय स्थान का पवित्र मंदिर है। यहाँ महाभारत के युद्ध के पश्चात पांडवों द्वारा स्थापित भगवान शिव के नाभि-भाग की पूजा की जाती है।
पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत युद्ध में हुए नरसंहार के पश्चात् पांडव अपने पापों (गोत्र हत्या और बंधु हत्या) से मुक्ति पाना चाहते थे और इसके लिए उन्होंने भगवान शिव का आशीर्वाद मांगा। शिव पांडवों से नाराज थे और उनसे छिपने के लिए हिमालय चले गए। पांडव भी उन्हें खोजते हुए हिमालय तक पहुँच गए।
जब पांडवों ने शिवजी को पहचान लिया, तो भगवान शिव ने एक बैल (नंदी) का रूप धारण कर लिया और अन्य बैलों के झुंड में छिप गए। भीम ने तब विशाल रूप धारण कर अपने दोनों पैर फैला दिए और बैलों के झुंड को अपने पैरों के नीचे से गुजरने को कहा। सभी बैल निकल गए, लेकिन भगवान शिव रूपी बैल भूमि में अंतर्ध्यान होने लगा। तब भीम ने उस बैल की पीठ को पकड़ लिया।
इस खींचतान में बैल (शिव) के शरीर के अंग अलग-अलग स्थानों पर गिर गए। ये सभी स्थान आज 'पंच केदार' के नाम से पूजते हैं:
मदमहेश्वर: यहाँ भगवान शिव की नाभि गिरी थी (इसीलिए यहाँ मध्य भाग/नाभि की पूजा होती है)।
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