Osho on Guru Gorakhnath Ji...✨️ #gorakhnath #osho #oshoquotes #oshoongorakhnathji #gorakhnathji
Shourya Choudhary
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Osho on Guru Gorakhnath Ji...✨️ #gorakhnath #osho #oshoquotes #oshoongorakhnathji #gorakhnathji
2 315 просмотров · 4 мес. назад
Shourya Choudhary
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यह प्रसंग महाकवि सुमित्रानंदन पंत और ओशो के बीच हुए एक गहरे आध्यात्मिक संवाद पर आधारित है। जब पंत जी ने ओशो से भारत के इतिहास में से सर्वश्रेष्ठ नामों को चुनने का आग्रह किया, तो ओशो ने बारह नामों से शुरुआत करके अंत में केवल चार महासूर्यों को चुना, जिनमें श्रीकृष्ण, महर्षि पतंजलि, गौतम बुद्ध और गुरु गोरखनाथ शामिल थे। कबीर, महावीर और शंकराचार्य जैसे लोक-प्रसिद्ध संतों को सूची से बाहर देखकर और गोरखनाथ जी का नाम अंत तक बना रहने पर पंत जी के मन में गहरा संशय जाग्रत हुआ कि ओशो ने गोरखनाथ का नाम सूची से क्यों नहीं हटाया। पंत जी के इसी संशय को दूर करते हुए ओशो ने एक अद्भुत रहस्य उजागर किया और समझाया कि बाकी के संत और दार्शनिक तो किसी भव्य मंदिर के ऊंचे शिखर या चमकते हुए स्वर्ण-कलश की तरह हैं जो ऊपर से सबको दिखाई देते हैं, लेकिन गुरु गोरखनाथ उस अध्यात्म के मंदिर की बुनियाद के असली पत्थर यानी शूल हैं। ओशो के अनुसार भारत में बाद में जितने भी महान संत हुए, चाहे वे कबीर हों या नानक, वे सब गोरखनाथ की ही तैयार की हुई ज़मीन से पैदा हुए क्योंकि गोरखनाथ साधना और तंत्र के वैज्ञानिक मार्ग के आदि-आविष्कारक थे। ओशो ने स्पष्ट किया कि गोरखनाथ को इस सूची से हटा देने का मतलब अध्यात्म विज्ञान की पूरी रीढ़ की हड्डी को ही गायब कर देना होता, क्योंकि वे दिखाई न देने वाली वह मजबूत नींव हैं जिस पर भारत की पूरी संत परंपरा टिकी हुई है।
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