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जगजननी जय जय | Jag Janani Jay Jay | Durga maa Aarti | Navratri Matarani Aarti | Navrartri Bhajan

Amrita Chaturvedi

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जगजननी जय जय | Jag Janani Jay Jay | Durga maa Aarti | Navratri Matarani Aarti | Navrartri Bhajan

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Amrita Chaturvedi
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#durgapuja #durga #navratri #aarti #durgaaarti #maadurga Please like the video and Subscribe the channel for more devotional and melodies🙏 Credits: Singer: Amrita Chaturvedi Upadhyay Lyrics: Traditional Music: Rohit Kumar (Bobby) Flute: Pt. Ajay Shankar Prasanna Sitar: Pt. Sunil Kant Mixmaster: Mix Box Studio Video credits: UM Productions (Utkarsh Mishra, 8929967696) ℗ 2023 Amrita Chaturvedi जगजननी जय! जय!! मॉं! जगजननी जय! जय!! । भयहारिणि, भवतारिणि, भवभामिनि जय! जय ॥ ॥ जगजननी जय जय..॥ तू ही सत-चित-सुखमय शुद्ध ब्रह्मरूपा । सत्य सनातन सुन्दर पर-शिव सुर-भूपा ॥ ॥ जगजननी जय जय..॥ आदि अनादि अनामय अविचल अविनाशी । अमल अनन्त अगोचर अज आनँदराशी ॥ ॥ जगजननी जय जय..॥ अविकारी, अघहारी, अकल, कलाधारी । कर्त्ता विधि, भर्त्ता हरि, हर सँहारकारी ॥ ॥ जगजननी जय जय..॥ तू विधिवधू, रमा, तू उमा, महामाया । मूल प्रकृति विद्या तू, तू जननी, जाया ॥ ॥ जगजननी जय जय..॥ राम, कृष्ण तू, सीता, व्रजरानी राधा । तू वांछाकल्पद्रुम, हारिणि सब बाधा ॥ ॥ जगजननी जय जय..॥ दश विद्या, नव दुर्गा, नानाशस्त्रकरा । अष्टमातृका, योगिनि, नव नव रूप धरा ॥ ॥ जगजननी जय जय..॥ तू परधामनिवासिनि, महाविलासिनि तू । तू ही श्मशानविहारिणि, ताण्डवलासिनि तू ॥ ॥ जगजननी जय जय..॥ सुर-मुनि-मोहिनि सौम्या तू शोभाऽऽधारा । विवसन विकट-सरुपा, प्रलयमयी धारा ॥ ॥ जगजननी जय जय..॥ तू ही स्नेह-सुधामयि, तू अति गरलमना । रत्‍‌नविभूषित तू ही, तू ही अस्थि-तना ॥ ॥ जगजननी जय जय..॥ मूलाधारनिवासिनि, इह-पर-सिद्धिप्रदे । कालातीता काली, कमला तू वरदे ॥ ॥ जगजननी जय जय..॥ शक्ति शक्तिधर तू ही नित्य अभेदमयी । भेदप्रदर्शिनि वाणी विमले! वेदत्रयी ॥ ॥ जगजननी जय जय..॥ हम अति दीन दुखी मा! विपत-जाल घेरे । हैं कपूत अति कपटी, पर बालक तेरे ॥ ॥ जगजननी जय जय..॥ निज स्वभाववश जननी! दयादृष्टि कीजै । करुणा कर करुणामयि! चरण-शरण दीजै ॥ ॥ जगजननी जय जय..॥ जगजननी जय! जय!! मॉं! जगजननी जय! जय!! । भयहारिणि, भवतारिणि, भवभामिनि जय! जय ॥ ॥ जगजननी जय जय..॥ तू ही सत-चित-सुखमय शुद्ध ब्रह्मरूपा । सत्य सनातन सुन्दर पर-शिव सुर-भूपा ॥ ॥ जगजननी जय जय..॥ आदि अनादि अनामय अविचल अविनाशी । अमल अनन्त अगोचर अज आनँदराशी ॥ ॥ जगजननी जय जय..॥ अविकारी, अघहारी, अकल, कलाधारी । कर्त्ता विधि, भर्त्ता हरि, हर सँहारकारी ॥ ॥ जगजननी जय जय..॥ तू विधिवधू, रमा, तू उमा, महामाया । मूल प्रकृति विद्या तू, तू जननी, जाया ॥ ॥ जगजननी जय जय..॥ राम, कृष्ण तू, सीता, व्रजरानी राधा । तू वांछाकल्पद्रुम, हारिणि सब बाधा ॥ ॥ जगजननी जय जय..॥ दश विद्या, नव दुर्गा, नानाशस्त्रकरा । अष्टमातृका, योगिनि, नव नव रूप धरा ॥ ॥ जगजननी जय जय..॥ तू परधामनिवासिनि, महाविलासिनि तू । तू ही श्मशानविहारिणि, ताण्डवलासिनि तू ॥ ॥ जगजननी जय जय..॥ सुर-मुनि-मोहिनि सौम्या तू शोभाऽऽधारा । विवसन विकट-सरुपा, प्रलयमयी धारा ॥ ॥ जगजननी जय जय..॥ तू ही स्नेह-सुधामयि, तू अति गरलमना । रत्‍‌नविभूषित तू ही, तू ही अस्थि-तना ॥ ॥ जगजननी जय जय..॥ मूलाधारनिवासिनि, इह-पर-सिद्धिप्रदे । कालातीता काली, कमला तू वरदे ॥ ॥ जगजननी जय जय..॥ शक्ति शक्तिधर तू ही नित्य अभेदमयी । भेदप्रदर्शिनि वाणी विमले! वेदत्रयी ॥ ॥ जगजननी जय जय..॥ हम अति दीन दुखी मा! विपत-जाल घेरे । हैं कपूत अति कपटी, पर बालक तेरे ॥ ॥ जगजननी जय जय..॥ निज स्वभाववश जननी! दयादृष्टि कीजै । करुणा कर करुणामयि! चरण-शरण दीजै ॥ ॥ जगजननी जय जय..॥