Ramleela | रामलीला | Day - 10 | Live | Ramanand Sagar’s Ramayan
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Ramleela | रामलीला | Day - 10 | Live | Ramanand Sagar’s Ramayan
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• संकटमोचन नाम तिहारो - श्री हनुमान अष्टक | ...
श्री हनुमानाष्टक आदित्य गढ़वी के भावयुक्त स्वर में। संकटमोचन हनुमानाष्टक की संरचना गोस्वामी तुलसीदास ने की थी. माना जाता है कि संकटमोचन हनुमानाष्टक का पाठ करने से व्यक्ति अपनी हर बाधा और पीड़ा से मुक्त हो जाता है और उसके सभी संकट दूर हो जाते हैं।
Watch the video song of ''Darshan Do Bhagwaan'' here - • दर्शन दो भगवान | Darshan Do Bhagwaan | Sur...
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रावण जब श्री राम की शांति प्रस्ताव को ठुकरा देता है तो रावण और श्री राम की सेना में युद्ध छिड़ जाता है। रावण के बहुत से सेनानी युद्ध में मारे जाते हैं मकराक्ष को भी श्री राम विभीषण की मदद से मार देते हैं। मकराक्ष की मृत्यु के बाद रावण स्वयं युद्ध भूमि में आता है और श्री राम को ललकारता है श्री राम रावण को युद्ध में हरा देते हैं और निहत्था कर देते हैं। श्री राम रावण को जीवन दान दे देते हैं और कहते हैं की हम क्षत्रिय हैं इसलिए हम निहत्थे शत्रु पर कभी वार नहीं करते। रावण अपमान का घूँट पीकर वापस राज महल लौट आता है और अपने भाई कुम्भकर्ण को जगाने के आदेश देता है। कुम्भकर्ण जागने के बाद भोजन करता है और उसे पता चलता है की रावण ने सीता कर हरण किया है और जिसके कारण लंका पर श्री राम ने आक्रमण कर दिया है।
कुम्भकर्ण रावण के पास जाता है और उस से मिलकर उसकी गलती को उसे बताता है। रावण कुम्भकर्ण को युद्ध में जाने के लिए कहता है और कुम्भकर्ण अपने बड़े भई का साथ देने के लिए ग़लत होते हुए भी रावण का साथ देता है। युद्ध के मैदान में कुम्भकर्ण को देख सब वानर डर जाते है। विभीषण श्री राम को बताता है की यह मेरा बड़ा भाई है। विभीषण अपने भई को समझने के लिए जाता है की वो युद्ध ना करे लेकिन कुम्भकर्ण रावण का साथ निभाने के लिए आया था और वो अपने प्राण देने के लिए भी तैयार था। श्री राम और कुम्भकर्ण में युद्ध छिड़ जाता है और श्री राम कुम्भकर्ण का वध कर देते हैं। कुम्भकर्ण के वध की बात सुन कर रावण को धक्का लगता है और उसे युद्ध में हार दिखने लगती है। कुम्भकर्ण की मृत्यु से दुःखी और चिंतित रावण सोच में पद था की अब युद्ध में उसका क्या होगा तभी मेघनाध वहाँ आता है और अपने पिता की चिंता को दूर करने के लिए युद्ध में जाने की आज्ञा माँगता है।
रावण मेघनाध को युद्ध में जाने की आज्ञा दे देता है। इंद्रजीत बहुत ही शक्तिशाली योद्धा था और माया में भी निपुण था। इंद्रजीत युद्ध के मैदान में जाकर राम और लक्ष्मण को युद्ध के लिए ललकारता है। श्री राम अपने भाई लक्ष्मण को उस से युद्ध करने के लिए भेज देते हैं दोनों में युद्ध छिड़ जाता है। इंद्रजीत अपनी माया का इस्तेमाल कर के श्री राम और लक्ष्मण पर नाग पाश का इस्तेमाल कर उन्हें नागपाश में बांध देता है। वानर सेना में हड़कम्प मच जाता है और सभी पीछे हट जाते हैं। रावण अपने बेटे मेघनाध की विजय की ख़ुशी मनाता है और उसका स्वागत करता है। श्री राम और लक्ष्मण को नागपाश से मुक्त कराने के लिए हनुमान जी गरुड़ राज को लाते हैं और उनसे श्री राम और लक्ष्मण को मुक्त करने के लिए कहते हैं। गरुड़ राज श्री राम और लक्ष्मण को नागपाश से मुक्त कर देते हैं।
नागपाश से मुक्त होने की खबर इंद्रजीत को लगती है तो वह अगले दिन युद्ध के मैदान में आ जाता है और लक्ष्मण से युद्ध करने लगता है। इस बार मेघनाध अधिक क्रोध में था और वो लक्ष्मण से युद्ध में हराने के इरादे से आया था इसलिए वह लक्ष्मण पर बर्छी का इस्तेमाल कर देता है जिसे हनुमान जी भी नहीं रोक पाते और वह बर्छी लक्ष्मण को लग जाती है जिसके कारण वो बेहोश हो जाते हैं। श्री राम अपने भाई को बेहोश देख कर द्रवित हो जाते हैं और रोने लगते हैं। श्री राम अपने भाई को होश में लाने के लिए सभी से मदद माँगते हैं तो विभीषण हनुमान जी को लंका के राज वैद्य सुषेण जी को लाने के लिए कहते हैं। हनुमान जी राज वैद्य को उनके घर शित उठा लाते हैं। राज वैद्य लक्ष्मण का उपचार करने से मना कर देते हैं क्योंकि वो लंका पति रावण के शत्रु थे।
श्री राम वैद्य को लक्ष्मण के इलाज के लिए मना लेते हैं। वैद्य सुषेण हनुमान जी को संजीवनी बूटी लने के लिए कहते हैं क्योंकि लक्ष्मण को संजीवनी बूटी से ही बचाया जा सकता था वरना उनके पास सिर्फ़ सूर्योदय तक का ही समय था। हनुमान जी संजीवने बूटी लेने के लिए हिमालय की ओर उड़ चलते हैं और सुबह तक संजीवनी लाने के लिए बिना रुके आगे बड़ते हैं। रावण अपने एक कालनेमी नाम के राक्षस को हनुमान जी को संजीवनी लाने से रोकने के लिए भेजते हैं। कालनेमी हनुमान जी ब्राह्मण रूप में राम नाम जपते हुए मिलता है तो हनुमान जी उनके पास रुक जाते है। कालनेमी उन्हें अपनी बातों मीन फ़साने के लिए कहता है की वो उन्हें हिमालय तक पलक झपकते ही पहुँचा देगा इसके लिए उन्हें पहले स्नान करके उनके साथ ध्यान लगाना होगा।
हनुमान जी स्नान करने जाते हैं तो उन्हें एक मगरमच्छ खाने के लिए आता है जिसे हनुमान जी मार देते हैं। उस मगरमच्छ से एक देव कन्या प्रकट होती है और वो उन्हें कालनेमी की सच्चाई बता देती है। हनुमान जी कालनेमी को इसके असली रूप में आने के लिए विवश कर देते हैं और उसका वध कर देते हैं। हनुमान जी संजीवनी बूटी को पहचानने में असमर्थ थे इसलिए वो पूरा पर्वत ही उठा लेते हैं और लक्ष्मण को बचाने के लिए उड़ चलते हैं। हनुमान जी संजीवनी लेकर पहुँच जाते हैं और राज वैद्य लक्ष्मण को संजीवनी पिला कर होश में ले आते हैं। मेघनाध को जब लक्ष्मण के मूर्छा से जाग जाने के समाचार मिलता है तो वह अगले दिन युद्ध में पूरी शक्ति लगाने के लिए अपनी कुल देवी का यज्ञ करने के लिए जाता है जिस से उसे शक्तियाँ मिल जाती और उसे युद्ध में हराना मुश्किल हो जाता।
विभीषण मेघनाध के गुप्त स्थान के बारे में जनता था तो वह लक्ष्मण और वानर सेना सहित वहाँ पहुँच जाता है और मेघनाध के यज्ञ को भंग करवा देता है।
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