Перейти к содержимому

भगवद गीता – अध्याय 1, श्लोक 24 |मन के शत्रु: काम, क्रोध, मोह, लोभ से कैसे बचें

Maanavta ( Ek alag soch )

0:00 / 0:00

भगवद गीता – अध्याय 1, श्लोक 24 |मन के शत्रु: काम, क्रोध, मोह, लोभ से कैसे बचें

43 просмотра · 1 г. назад
Maanavta ( Ek alag soch )
233 подписчика
43 просмотра · 1 г. назад
📖 Shlok (श्लोक 1.24): सञ्जय उवाच — एवमुक्तो हृषीकेशो गुडाकेशेन भारत। सेनयोरुभयोर्मध्ये स्थापयित्वा रथोत्तमम्॥ ✨ Explanation (व्याख्या): श्लोक में अर्जुन (गुडाकेश) की बात मानकर श्रीकृष्ण (हृषीकेश) रथ को दोनों सेनाओं के बीच में खड़ा करते हैं। यह केवल शारीरिक युद्ध नहीं, बल्कि अर्जुन के अंदर चल रहे मानसिक युद्ध का भी प्रतीक है। सेनाएं बाहरी हैं, लेकिन भीतर की सेना — काम, क्रोध, मोह, लोभ — उससे भी भयंकर है। 👉 काम (वासना): तृप्त न होने वाली इच्छाएं आत्मा को भटकाती हैं। 👉 क्रोध: विवेक नष्ट करता है। 👉 मोह: झूठे संबंधों में बाँधता है। 👉 लोभ: आत्मा को कभी संतोष नहीं होने देता। इनसे बचने के लिए चाहिए: विवेक और ज्ञान आत्मनिरीक्षण ध्यान और भक्ति सत्संग और गीता अध्ययन #BhagavadGita #GeetaGyan #ShlokMeaning #SpiritualAwakening #Krodh #Kaam #Moh #Lobh #InnerPeace #KrishnaArjuna #GitaChapter1 #MindControl #HindiMotivation #SanatanDharma