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बेटी तिलक गीत अरे अरे काली बदरिया ओनई जिन बरसिव हो बदरी छाता बिना आहे कवन रामा उनई जिन भेयउ हो

RUBI MISHRA LOKGEET (AMETHI)

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बेटी तिलक गीत अरे अरे काली बदरिया ओनई जिन बरसिव हो बदरी छाता बिना आहे कवन रामा उनई जिन भेयउ हो

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RUBI MISHRA LOKGEET (AMETHI)
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इस सुंदर बेटी तिलक गीत में भावनाओं की गहराई झलकती है। गाना है — "अरे अरे काली बदरिया ओनई जिन बरसिव..." जो एक पिता के मन की व्यथा और बेटी की विदाई से पहले की भावुकता को दर्शाता है। यह गीत पारंपरिक तिलक रस्म की भावनाओं को जीवंत करता है। 🎵 इस गीत को प्रस्तुत किया है रूबी मिश्रा ने, जो लोकगीतों की संस्कृति को सजीव बनाए हुए हैं। 👉 देखना न भूलें और अपने परिवार के साथ जरूर शेयर करें। चैनल: Rubi Mishra Lokgeet