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13th Oct 2007 , Agra Atma Saxatkar Divas Satsang ( साक्षात्कार दिवस ) | Sant Asaram Bapu ji

Sant Shri Asharamji Ashram

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13th Oct 2007 , Agra Atma Saxatkar Divas Satsang ( साक्षात्कार दिवस ) | Sant Asaram Bapu ji

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Sant Asaram Bapu: साक्षात्कार दिवस Satsang (Agra, 13th Oct 2007). Endearingly called 'Bapu ji'(Asaram Bapu Ji), His Holiness is a Self-Realized Saint from India. Pujya Asaram Bapu ji preaches the existence of One Supreme Conscious in every human being; be it Hindu, Muslim, Christian, Sikh or anyone else. For more information, please visit - www.ashram.org (Official Website) -------------------------------------------------- सत्संग के कुछ मुख्य अंश: भगवान सत् स्वरूप है, चेतन स्वरूप है, ज्ञान स्वरूप है, आनंद स्वरूप है, कर्म का नियामक है, कर्म का प्रेरक है, और कर्म का फलदाता है... और सब कुछ करते कराते भी निर्लेप नारायण है....वो ही आत्मा होकर बैठा है... एक घड़ी, आधी घड़ी, आधी में पुनि आध, तुलसी संगत साध की, हरे कोटि अपराध | करोड़ों करोड़ों वासनाओं से, करोड़ों करोड़ों आकर्षणों से भटकता हुआ यह जीवात्मा सत्संग से ही पार हो जाता है... अपनी चाह का direction ईश्वर की तरफ कर दो...बस.. संसारी मजों में sex को सर्वोपरि मानते हैं लोग...लेकिन मलीन अंगों के साथ तादात्म्य नहीं करेगा, तो sex का सुख आएगा क्या? एक दूसरे की थूक चाटते हैं, एक दूसरे के गंदे अंगों से एकता करते हैं, तब सुख मिला (sex का), और बाद में क्या होता है? फै... सिर को धूप से बचायें, और मन को व्यर्थ आकर्षणों से बचायें... और बुद्धि को व्यर्थ निर्णय से बचायें...और अपने आप को नश्वर देह को 'मैं' मानकर अज्ञान से बचायें...बस काम हो गया.... अपने को अज्ञान से बचायें, बुद्धि को संकीर्णता और तुच्छ आकर्षणों से बचायें...मन को व्यर्थ चिंतन से बचायें... पूज्य बापूजी ने कैसे मैया जी को समझाया था और घर छोड़कर ईश्वर प्राप्ति के लिये गए थे... नर्मदा किनारे साधना करते हुए पूज्य बापूजी की लालजी महाराज से मित्रता कैसे हुई ? घर वापिस ले जाने के लिये आये मैया जी और माँ मंगीबा जी को कैसे बापूजी ने समझाया ? कैसे मियागाँव रेलवे स्टेशन पर मैया जी और माँ मंगीबा जी को छोड़कर पूज्य बापूजी ने अमदावाद के बजाये मुंबई की ट्रेन पकड़ी साईं लीलाशाह जी महाराज के दर्शन करने के लिये.... लीलाशाह जी ने पूज्य बापूजी को पंचदशी का कौन सा उपदेश सुनाया और उन पर नज़र डालकर कैसे साक्षात्कार कराया... आसोज सुद दो दिवस, संवत बीस इक्कीस... मध्यान ढाई बजे, मिला ईस से ईस... साक्षात्कार हो जाये तो आपका बाह्य व्यवहार तो यथायोग्य होगा, लेकिन अन्दर से जगमगाती ज्योत, ज्यों की त्यों समझ बनी रहेगी... संसारी लोगों को सुख के समय जितना हर्ष होता है, उतना आप (ज्ञानी) को नहीं होगा क्योंकि आप परम सुख में हैं... साक्षात्कार होने के बाद राज्य मिले तो हर्ष नहीं, और राज्य चला जाये तो शोक नहीं... राम राज्य की घोषणा हुई और श्रीरामजी की बांछें खिली नहीं...ज्यों की त्यों समता... और रामराज्य के बदले एकाएक राम वनवास का हादसा हुआ...(लेकिन) श्रीरामचंद्रजी वही के वही.... -------------------------------------------------- Subscribe Us Now !!! for Latest Video Updates from Sant Shri Asaram ji Bapu Ashram : https://www.youtube.com/user/SantAmri... To Watch FREE LIVE Webcast of Sant Shri Asharamji Bapu on Mangalmay TV Visit : http://www.ashram.org/live For More Information Visit Official website of Sant Shri Asaram ji Bapu Ashram : http://www.ashram.org Join Ashram on Facebook   / santshriasharamjibapu   Join MPPD on Facebook   / parentsworshipday