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दुष्कर्म की सुनवाई महिला आयोग नहीं करता... Chandi Dutt Shukla Poetry | Sanjeev Paliwal | Sahitya Tak

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दुष्कर्म की सुनवाई महिला आयोग नहीं करता... Chandi Dutt Shukla Poetry | Sanjeev Paliwal | Sahitya Tak

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सबसे बुरा है उस हँसी का मर जाना जो जाग गई थी तुम्हारी एक मुस्कान से। जमा हुआ दुख पिघला आँख से आँसू बनकर तुमने समेट ली थी पीड़ा की बूँद अँगुली की पोर पर। वह सब मन का तरल गरल व्यर्थ है अब— जैसे लैबोरेट्री की किसी शीशी में रखा हो थोड़ा-सा निस्तेज वीर्य ठंडा गाढ़ा काला ख़ून या देह का कोई और निष्कार्य अवयव। खिड़कियों के बाहर कुछ दरके हुए यक़ीन लटके हैं चमगादड़ों की तरह बेआवाज़ शोर करते हैं झूठे वादे। कविताएँ सिर्फ़ गूँज पैदा करती हैं नहीं बदलतीं क़िस्मत जैसे कि प्रेम का लंगड़ा होना उससे पहले से तय होता है, जब पहली बार वह भरता है दो डग हँसी की ओर। चलती रहती है इश्क की साँस तब मन के उदर में पलता है कविता का भ्रूण और खा जाता है एक दिन वही कोमल एहसास इच्छा का राक्षस। ढल जाता है साथ देखा गया ठंडा चाँद गमलों के इर्द-गिर्द उगती रचनाएँ कुम्हलाई पत्तियों की राख में हैं पैवस्त एक उदास आदमी चीख़ता हु कोसता है ख़ुद को कहते हुए—क्यों नहीं है मेरे प्रेम में ताक़त? कैसे घुल-सी गई एक बार फिर ‘सुनो, मेरी आवाज़ सुनो’ की पुकार! कौन बताए— प्रेम का सूरज अस्त होने के लिए ही उगता है कभी नहीं रुकता कोई सिर्फ़ प्रेम के लिए, प्रेम के सहारे। प्रेम की कहानियाँ इच्छाओं के लोक में बेसुरी फुसफुसाहट से ज़्यादा औक़ात नहीं रखतीं। विरह मिलन से बड़ा सत्य है और बेहद खरी गारंटी भी जिसके साथ धोखे की रस्सी से बुने कार्ड पर लिखा है— टूटेगा मन जो जोड़ने की कोशिश की। बहुत पहले नाज़ुक हाथों को थामकर लिखी थी एक गुननुगाहट पाखंड के साइक्लोन ने ढहा दिया रेत का महल। समंदर किनारे प्रेम की क़ब्र बनती है ताजमहल हमेशा नवाबों के हिस्से आते हैं। आज राजा अँग्रेज़ी बोलते हैं चमकते अपार्टमेंट्स में होता है उनका ठिकाना वहीं ऊँची बिल्डिंगों के बाहर कूड़ेदान के पास पॉलीथीन में लिपटे रहते हैं कुछ सच्चे चुंबन, चंद गाढ़े आलिंगन और हज़ारों काल्पनिक वादे! निर्लज्ज हँसी और बेबस आँसुओ अपने लिए गढ़े नए नियमों, दुत्कारों और आरोपों, गाढ़े धूसर रंग की शिकायतों और इन सबके साथ हुए असीम पछतावे के साथ सब कुछ भले लौट आए पर नहीं वापस आता राह भटका हुआ विश्वास। छलिया आकाश ने निगल लिया है एक गहरा साथ! लुप्त हुई नेह की एक और आकाशगंगा प्रेम से फिर बड़ा साबित हुआ, उन्माद का ब्लैकहोल! प्रेम की अकालमृत्यु पर आओ, खिलखिलाकर हँसें। हमारे काल का सबसे शर्मनाक सत्य है— मन की अटूट प्रतीक्षा से बार-बार बलात्कार। कहने को प्रतीक्षा भी स्त्रीलिंग है, लेकिन उससे हुए दुष्कर्म की सुनवाई महिला आयोग नहीं करता। चंडीदत्त शुक्ल आज की कविता में वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक संजीव पालीवाल से सुनिए चंडीदत्त शुक्ल की बेहतरीन कविता. #chandiduttshukla #aajkikavita #poetry #sanjeevpaliwal #sahityatak About the Channel Sahitya Tak आपके पास शब्दों की दुनिया की हर धड़कन के साथ I शब्द जब बनता है साहित्य I वाक्य करते हैं सरगोशियां I जब बन जाती हैं किताबें, रच जाती हैं कविताएं, कहानियां, व्यंग्य, निबंध, लेख, किस्से व उपन्यास I Sahitya Tak अपने दर्शकों के लिये लेकर आ रहा साहित्य के क्षेत्र की हर हलचल I सूरदास, कबीर, तुलसी, भारतेंदु, प्रेमचंद, प्रसाद, निराला, दिनकर, महादेवी से लेकर आज तक सृजित हर उस शब्द की खबर, हर उस सृजन का लेखा, जिससे बन रहा हमारा साहित्य, गढ़ा जा रहा इतिहास, बन रहा हमारा वर्तमान व समाज I साहित्य, सृजन, शब्द, साहित्यकार व साहित्यिक हलचलों से लबरेज दिलचस्प चैनल Sahitya Tak. तुरंत सब्स्क्राइब करें व सुनें दादी मां के किस्से कहानियां ही नहीं, आज के किस्सागो की कहानियां, कविताएं, शेरो-शायरी, ग़ज़ल, कव्वाली, और भी बहुत कुछ I Sahitya Tak - Welcome to the rich world of Hindi Literature. From books to stories to poetry, essays, novels and more, Sahitya Tak is a melting pot where you will keep abreast of what's the latest in the field of literature. We also delve into our history and culture as we explore literary gems of yesteryears from Surdas, Kabir, Tulsi, Bhartendu, Premchand, Prasad, Nirala, Dinkar, Mahadevi, etc. To know more about how literature shapes our society and reflects our culture subscribe to Sahitya Tak for enriching stories, poems, shayari, ghazals, kawali and much more. Subscribe Sahitya Tak now. ............................ Links: Facebook:   / sahityatakofficial   Instagram:   / sahityatak   Twitter:   / sahitya_tak