Перейти к содержимому

क्या तिर्यंच गति में भी जातिस्मरण हो सकता है? | नंदन मणियार की पावन कथा | भगवान महावीर स्वामी

JAIN SUTRA

0:00 / 0:00

क्या तिर्यंच गति में भी जातिस्मरण हो सकता है? | नंदन मणियार की पावन कथा | भगवान महावीर स्वामी

1 016 просмотров · 1 день назад
JAIN SUTRA
212 подписчиков
1 016 просмотров · 1 день назад
*जय जिनेंद्र! 🙏* भगवान महावीर स्वामी की पावन वाणी और जैन आगमों पर आधारित यह कथा राजगृह के प्रसिद्ध श्रावक *नंद मणियार (नंदन मणियार)* और उनकी आत्मा के कल्याण की प्रेरक गाथा है। *इस कथा के मुख्य अंश:* • *पोषध व्रत और संकल्प:* उपवास के दौरान ग्रीष्म की प्यास से जल-कल्याण हेतु बावड़ी बनवाने का विचार। • *सूक्ष्म आसक्ति और भटकाव:* निर्मित बावड़ी के प्रति अत्यधिक मोह और प्रशंसा में उलझकर आत्म-साधना से विमुख होना। • *तिर्यंच गति में जन्म:* बावड़ी के प्रति तीव्र आर्तध्यान के कारण उसी बावड़ी में मेंढक (दर्दूर्) के रूप में जन्म। • *जातिस्मरण ज्ञान:* भगवान महावीर स्वामी के आगमन की बात सुनकर पूर्वभव के १२ व्रतों और प्रभु का स्मरण होना। • *अमर जिन-भक्ति:* मुख में कमल की पंखुड़ी दबाकर प्रभु दर्शन हेतु प्रस्थान और निष्कपट भक्ति से सौधर्म देवलोक में *दुर्दरानक देव* की प्राप्ति। यह कथा हमें सिखाती है कि शुभ कार्यों में भी सूक्ष्म ममत्व आत्मा के लिए बंधन बन सकता है, किंतु निर्मल जिन-भक्ति और पश्चाताप से आत्मा परम गति को प्राप्त कर सकती है।#Jainism #BhagwanMahavir #JainStory #NandManiyar #JatismathanGyan #JainKatha #JainDharma #JainismInHindi #Samavsaran #SpiritualStory #JainBhakti #Jainism accident story