दसवां क्यों मनाया जाता है || Significance of Dashva in Hinduism || Garun Puran || Daivik Guru
The Daivik Guru
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दसवां क्यों मनाया जाता है || Significance of Dashva in Hinduism || Garun Puran || Daivik Guru
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मृत्यु पश्चात दाहकर्म के बाद मृतात्मा को सबसे पहले दशगात्र पिंड दिए जाते हैं। इसके पीछे मान्यता है कि यह शरीर का सूक्ष्म रूप (परिमाण अंगुष्ठ मात्र) होता है और मृतात्मा लोकांतर जाती है। जिसका श्राद्ध नहीं होता, वे वायुमंडल में भूत-पिशाच बनकर भटकते रहते हैं। अतः दशगात्र श्राद्ध द्वारा चावल आदि के पिंडों में सोम भाग पहुँचाने से श्रद्धारूप भाग का पोषण होता है, जिनसे पितरों का सोमभाग पूरा होता है और वे चन्द्रमंडल तक पहुँचने में सफल होते हैं।
तपस्वी, संन्यासी आदि देवयान से जाते हैं, उन्हें सोम द्वारा सूक्ष्म शरीर के पोषण की आवश्यकता नहीं होती, इसीलिए उनका दशगात्र श्राद्ध नहीं होता। पितृलोक के मार्ग में बढ़ते हुए सूक्ष्म शरीर के लिए श्राद्ध कर उसका पोषण किया जाता है और प्रतिदिन कुछ न कुछ देकर उसमें आई कमी की पूर्ति की जाती है,
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