मीना कुमारी के आखिरी शब्द - "मैं मरना नहीं चाहती" | Pakeezah और डाकू वाली रात
Talluk
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मीना कुमारी के आखिरी शब्द - "मैं मरना नहीं चाहती" | Pakeezah और डाकू वाली रात
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मीना कुमारी - जिसे दुनिया ने ट्रेजेडी क्वीन कहा, पर जो असल में सबसे अकेली औरत थी।
इस वीडियो में जानिए 1 अगस्त 1932 को पैदा हुई महजबीं बानो कैसे मीना कुमारी बनी।
केदार शर्मा की दुअन्नी-चवन्नी से 100 रुपये तक का सफर।
परिणिता, बैजू बावरा, साहब बीबी और गुलाम से लेकर पाकीज़ा तक - कैसे उसने 32 साल तक राज किया।
और जानिए उसकी अनसुनी प्रेम कहानी - कैसे पूना के अस्पताल में मोसम्मी के जूस से कमाल अमरोही के साथ प्यार शुरू हुआ। रोज़ एक बिना टिकट वाला खत, रात 11:30 से सुबह 5:30 तक फोन पर बातें। और फिर शादी के बाद कमाल की वो 3 शर्तें - 6:30 बजे तक घर आना, मेकअप रूम में कोई मर्द नहीं, अपनी ही कार में आना-जाना।
राज कपूर की पार्टी वाला झूठ, चंबल के डाकू अमृत लाल द्वारा घेरना और हाथ पर चाकू से ऑटोग्राफ लेना, और आखिरी दिनों में गोमती के किनारे की शूटिंग के दौरान पीछे से पकड़ कर शॉट दिलवाना।
आखिर में सेंट एलिजाबेथ नर्सिंग होम के कमरा नंबर 26 में आखिरी शब्द - "आपा, मैं मरना नहीं चाहती।"
ये कहानी सिर्फ एक हीरोइन की नहीं, एक दौर की है।
आपको मीना कुमारी की कौन सी फिल्म सबसे ज्यादा पसंद है? कमेंट में बताइए।
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