जिस बेटे को जिंदगीभर संभाला, उसी ने मेरी हत्या की योजना बनाई… फिर एक अजनबी ने दरवाजा खटखटाया!
Rishton ki kahani
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जिस बेटे को जिंदगीभर संभाला, उसी ने मेरी हत्या की योजना बनाई… फिर एक अजनबी ने दरवाजा खटखटाया!
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एक माँ ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि जिस बेटे के लिए उसने पूरी जिंदगी लगा दी, एक दिन वही उसकी जान लेने की योजना बनाएगा।
रात के सन्नाटे में शारदा देवी ने अपने बेटे नितिन को फोन पर कहते सुना— “चालीस लाख तुम्हें तभी मिलेंगे, जब माँ रास्ते से हट जाएँगी…”
लेकिन कहानी ने अगली सुबह ऐसा मोड़ लिया जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी। जिस आदमी को उनकी हत्या के लिए चुना गया था, वही उनके दरवाजे पर पहुँचा और बोला— “मैं आपको मारने नहीं, बचाने आया हूँ।”
आखिर नितिन अपनी ही माँ के खिलाफ इतना बड़ा कदम उठाने तक क्यों पहुँचा? देवेंद्र का बीस साल पुराना सच क्या था? और महेश ने पैसे लेने के बजाय शारदा देवी को बचाने का फैसला क्यों किया?
यह कहानी सिर्फ एक अपराध की नहीं, बल्कि माँ-बेटे के टूटते भरोसे, छिपे हुए डर, अपराधबोध, गलतफहमी, आत्मसम्मान और रिश्तों में जवाबदेही की कहानी है।
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