बुद्ध का यह वचन सार्थक जीवन का आमंत्रण है। जीवन नश्वर है, फिर इतना अहंकार क्यों? । RAJENDRA FULE
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बुद्ध का यह वचन सार्थक जीवन का आमंत्रण है। जीवन नश्वर है, फिर इतना अहंकार क्यों? । RAJENDRA FULE
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कौसाम्बी के भिक्षुओं की कथा
इतना अहंकार-तनाव और लड़ाई क्यों?
मृत्यु की नहीं, यह जीवन को सही दृष्टि से देखने की बात है
अक्सर याद भी नहीं रहता कि झगड़ा किस बात पर शुरू हुआ था
लोग मुद्दे से ज्यादा अपने अहंकार की रक्षा करते रहते है
नश्वरता को संतुलित रूप से स्वीकार तो जीवन की प्राथमिकतायें बदल जाती है
उपलब्धियां प्राप्त करो, लेकिन उनके गुलाम मत बनो
अहंकार पिघलने लगता है, तब झगड़े छोटे हो जाते है और संबंध बड़े हो जाते है
तथागत बुद्ध का यह वचन सार्थक जीवन का आमंत्रण है