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Ghagh Bhaddari ke dohe | prediction | घाघ भड्डरी के दोहे | भविष्यवाणियाँ |

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Ghagh Bhaddari ke dohe | prediction | घाघ भड्डरी के दोहे | भविष्यवाणियाँ |

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Life style, Astrology & Palmistry, Meditation facilitating & Motivational speaking. online astrology live Ghagh Bhaddari ke dohe | prediction | घाघ भड्डरी के दोहे | भविष्यवाणियाँ | घाघ की बात घाघ की कहावत घाघ की जानकारी घाघ के जन्मकाल एवं जन्मस्थान के संबंध में बड़ा मतभेद है। इनकी जन्मभूमि कन्नौज के पास चौधरी सराय नामक ग्राम बताई जाती है। शिवसिंह सरोज का मत है कि इनका जन्म सं. 1753 में हुआ था, किंतु पं.रामनरेश त्रिपाठी ने बहुत खोजबीन करके इनके कार्यकाल को सम्राट् अकबर के राज्यकाल में माना है। कन्नौज के पास चौधरीसराय नामक ग्राम के रहने वाले घाघ के ज्ञान से प्रसन्न होकर सम्राट अकबर ने उन्हें सरायघाघ बसाने की आज्ञा दी थी। यह जगह कन्नौज से एक मील दक्षिण स्थित है। भड्डरी घाघ कवि की पत्नी थीं। घाघ-भड्डरी की वर्षा संबंधी लोकप्रिय कहावतें आदि न बरसे आद्रा, हस्त न बरसे निदान। कहै घाघ सुनु घाघिनी, भये किसान-पिसान।। अर्थात आर्द्रा नक्षत्र के आरंभ और हस्त नक्षत्र के अंत में वर्षा न हुई तो घाघ कवि अपनी स्त्री को संबोधित करते हुए कहते हैं कि ऐसी दशा में किसान पिस जाता है अर्थात बर्बाद हो जाता है। आसाढ़ी पूनो दिना, गाज, बीज बरसन्त। नासै लक्षण काल का, आनन्द माने सन्त।। अर्थात आषाढ़ माह की पूर्णमासी को यदि आकाश में बादल गरजे और बिजली चमके तो वर्षा अधिक होगी और अकाल समाप्त हो जाएगा तथा सज्जन आनंदित होंगे। उत्तर चमकै बीजली, पूरब बहै जु बाव। घाघ कहै सुनु घाघिनी, बरधा भीतर लाव।। अर्थात यदि उत्तर दिशा में बिजली चमकती हो और पुरवा हवा बह रही हो तो घाघ अपनी स्त्री से कहते हैं कि बैलों को घर के अंदर बांध लो, वर्षा शीघ्र होने वाली है। उलटे गिरगिट ऊंचे चढ़ै। बरखा होई भूइं जल बुड़ै।। अर्थात यदि गिरगिट उलटा पेड़ पर चढ़े तो वर्षा इतनी अधिक होगी कि धरती पर जल ही जल दिखेगा। करिया बादर जीउ डरवावै। भूरा बादर नाचत मयूर पानी लावै।। अर्थात आसमान में यदि घनघोर काले बादल छाए हैं तो तेज वर्षा का भय उत्पन्न होगा, लेकिन पानी बरसने के आसार नहीं होंगे। परंतु यदि बादल भूरे हैं व मोर थिरक उठे तो समझो पानी ‍निश्चित रूप से बरसेगा। चमके पच्छिम उत्तर कोर। तब जान्यो पानी है जोर ।। अर्थात जब पश्चिम और उत्तर के कोने पर बिजली चमके, तब समझ लेना चाहिए कि वर्षा तेज होने वाली है। चैत मास दसमी खड़ा, जो कहुं कोरा जाइ। चौमासे भर बादला, भली भां‍ति बरसाइ।। अर्थात चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की दशमी को यदि आसमान में बादल नहीं है तो यह मान लेना चाहिए कि इस वर्ष चौमासे में बरसात अच्छी होगी। जब बरखा चित्रा में होय। सगरी खेती जावै खोय।। अर्थात यदि चित्रा नक्षत्र में वर्षा होती है तो संपूर्ण खेती नष्ट हो जाती है। इसलिए कहा जाता है कि चित्रा नक्षत्र की वर्षा ठीक नहीं होती। माघ में बादर लाल घिरै। तब जान्यो सांचो पथरा परै।। अर्थात यदि माघ के महीने में लाल रंग के बादल दिखाई पड़ें तो ओले अवश्य गिरेंगे। तात्पर्य यह है कि यदि माघ के महीने में आसमान में लाल रंग दिखाई दे तो ओले गिरने के लक्षण हैं। रोहनी बरसे मृग तपे, कुछ दिन आर्द्रा जाय। कहे घाघ सुनु घाघिनी, स्वान भात नहिं खाय।। अर्थात घाघ कहते हैं कि हे घाघिन! यदि रोहिणी नक्षत्र में पानी बरसे और मृगशिरा तपे और आर्द्रा के भी कुछ दिन बीत जाने पर वर्षा हो तो पैदावार इतनी अच्‍छी होगी कि कुत्ते भी भात खाते-खाते ऊब जाएंगे और भात नहीं खाएंगे। सावन केरे प्रथम दिन, उवत न ‍दीखै भान। चार महीना बरसै पानी, याको है परमान।। अर्थात यदि सावन के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा को आसमान में बादल छाए रहें और प्रात:काल सूर्य के दर्शन न हों तो निश्चय ही 4 महीने तक जोरदार वर्षा होगी। शूकरवारी बादरी, रही सनीचर छाय। डंक कहे सुन भड्डरी, बिन बरसे ना जाए॥ अर्थ : शुक्रवार के बादल शनिवार को छाए रहें, तो भड्डरी कहते हैं कि वे बादल बिना बरसे नहीं जायेंगे. सावन मास बहे पुरवइया। बछवा बेच लेहु धेनु गइया॥ अर्थ : यदि सावन महीने में पुरवैया हवा बह रही हो तो अकाल पड़ने की संभावना है. किसानों को चाहिए कि वे अपने बैल बेच कर गाय खरीद लें. सर्व तपै जो रोहिनी, सर्व तपै जो मूर। परिवा तपै जो जेठ की, उपजै सातो तूर॥ अर्थ : रोहिणी भरपूर तपे और मूल भी पूरा तपे तथा जेठ की प्रतिपदा तपे तो सातों प्रकार के अन्न पैदा होंगे. भादों की छठ चांदनी, जो अनुराधा होय। ऊबड़ खाबड़ बोय दे, अन्न घनेरा होय।। अर्थ : यदि भादो सुदी छठ को अनुराधा नक्षत्र पड़े तो ऊबड़-खाबड़ जमीन में भी उस दिन अन्न बो देने से बहुत पैदावार होती है। सावन पहिले पाख में, दसमी रोहिनी होय। महंग नाज अरु स्वल्प जल, विरला विलसै कोय।। अर्थ : यदि श्रावण कृष्ण पक्ष में दशमी तिथि को रोहिणी हो तो समझ लेना चाहिए अनाज महंगा होगा और वर्षा स्वल्प होगी, विरले ही लोग सुखी रहेंगे। जब बरसेगा उत्तरा। नाज न खावै कुत्तरा।। यदि उत्तरा नक्षत्र बरसेगा तो अन्न इतना अधिक होगा कि उसे कुते भी नहीं खाएंगे। असाढ़ मास पूनो दिवस, बादल घेरे चन्द्र। तो भड्डरी जोसी कहैं, होवे परम अनन्द।। यदि आसाढ़ी पूर्णिमा को चन्द्रमा बादलों से ढंका रहे तो भड्डरी ज्योतिषी कहते हैं कि उस वर्ष आनन्द ही आनन्द रहेगा। दिन में गरमी रात में ओस, कहे घाघ बरखा सौ कोस ! अंडा लै चीटी चढ़ै, चिड़िया नहावै धूर कहै घाघ सुन भड्डरी वर्षा हो भरपूर । दिन में बद्दर रात निबद्दर , बहे पूरवा झब्बर झब्बर कहै घाघ अनहोनी होहिं कुआं खोद के धोबी धोहिं । तीतर पंखी बादरी विधवा काजर रेख या बरसे वा घर करे या में मीन न मेख।उगे अगस्त मेह नहीं मंडे जे मंडे तो धार न खंडे। उदित अगस्त पंथ जल सोखा, जिमी लोभहि सोखे संतोषा। सूर्य का संक्रामण जब होता है ----वृष 7 डिग्री में – तो अगस्त उदय सिंह 23 डिग्री – तो अगस्त अस्त होता है। घाघ की कहावतें घाघ भड्डरी की कहावतें हिंदी में घाघ के दोहे घाघ की कहावतें अर्थ सहित पुराने समय की कहावतें एवं दोहे डंक ऋषि के दोहे घाघ की नीति घाघ भड्डरी दोहे के रचयिता कौन है