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गुरु प्रदोष व्रत विशेष | शिव स्तोत्रम् | ॐ नमः शिवाय | भगवान शिव की दिव्य स्तुति

Trivenee Bhakti Vani

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गुरु प्रदोष व्रत विशेष | शिव स्तोत्रम् | ॐ नमः शिवाय | भगवान शिव की दिव्य स्तुति

239 просмотров · 13 дней назад
Trivenee Bhakti Vani
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॥ श्री शिवाय नमः ॥ 🙏🔱 गुरु प्रदोष व्रत के पावन अवसर पर भगवान महादेव को समर्पित यह दिव्य शिव स्तोत्रम् श्रद्धापूर्वक सुनें। 🕉️ इस पावन स्तुति में भगवान शिव के दिव्य स्वरूप, उनकी करुणा, शक्ति और भक्तों पर होने वाली कृपा का स्मरण किया गया है। माना जाता है कि प्रदोष काल में महादेव का ध्यान, नामस्मरण और स्तुति मन को शांति प्रदान करती है। 🌺 ॐ नमः शिवाय 🌺 🔱 हर हर महादेव 🔱 यदि आपको यह शिव स्तोत्रम् अच्छा लगे तो वीडियो को Like 👍, Share 🔄 और Subscribe 🔔 जरूर करें और महादेव के भक्तों तक इस भक्ति को पहुँचाएँ। 🙏 महादेव सभी भक्तों पर अपनी कृपा बनाए रखें। 🙏 हर हर महादेव। #️⃣ Hashtags #गुरुप्रदोष #प्रदोषव्रत #गुरुप्रदोषव्रत #शिवस्तोत्रम् #महादेव #भगवानशिव #ॐनमःशिवाय #हरहरमहादेव #शिवभक्ति #शिवजी #भोलेनाथ #महाकाल #शिवआराधना #प्रदोषकाल #सनातनधर्म #भक्तिगीत #भजन #शिवभजन #महादेवभक्ति 🏷️ YouTube Tags guru pradosh vrat, guru pradosh vrat 2026, pradosh vrat, guru pradosh, shiv stotram, shiv stotra, shiv bhajan, mahadev bhajan, lord shiva, om namah shivay, har har mahadev, mahadev song, shiv ji bhajan, bholenath bhajan, mahakal bhajan, pradosh vrat special, pradosh vrat bhajan, shiv mantra, shiv bhakti, mahadev status, sanatan bhakti, hindi bhajan, devotional song, shiv stuti, भगवान शिव, गुरु प्रदोष व्रत, शिव स्तोत्रम् ॥ शिव कृपा प्रदोष स्तोत्रम् ॥ ॥ गुरु प्रदोष व्रत विशेष ॥ **॥ मंगलाचर ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय । हर हर महादेव, हर हर महादेव ॥ प्रदोषकाले देवेशं, भक्त्या ध्यायन्ति मानवाः । शिवं शम्भुं महेशानं, दुःखशोकविनाशनम् ॥ प्रदोषकाले देवेशं, भक्त्या ध्यायन्ति मानवाः । शिवं शम्भुं महेशानं, दुःखशोकविनाशनम् ॥ हर हर शम्भो… हर हर शम्भो… गुरुप्रदोषे नमस्तुभ्यं, ॐ नमः शिवाय ॥ --- त्रिनेत्रं नीलकण्ठं च, चन्द्रमौलिं महेश्वरम् । गङ्गाधरं उमाकान्तं, वन्देऽहं परमेश्वरम् ॥ भस्माङ्गरागसंयुक्तं, नागहारविभूषितम् । त्रिशूलपाणिं देवेशं, वन्दे भक्तार्तिनाशनम् ॥ शिवं शान्तं शिवाकारं, शिवज्ञानप्रदायकम् । शरणागतदीनानां, नाथं वन्दे सदाशिवम् ॥ *ॐ नमः शिवाय… ॐ नमः शिवाय…* *हर हर महादेव… हर हर महादेव…* --- गुरुवारे प्रदोषे तु, शिवपूजा फलप्रदा । शिवनामस्मरणं पुण्यं, भक्तिमुक्तिप्रदायकम् ॥ प्रदोषसमये रम्ये, मन्दिरे शिवसन्निधौ । दीपं प्रज्वाल्य भक्त्या तु, स्मरेत् शम्भुं उमापतिम् ॥ बिल्वपत्रं समर्प्याथ, जलधारां विनिक्षिपेत् । “ॐ नमः शिवाय” इत्युक्त्वा, हृदयं शिवमर्पयेत् ॥ कैलासशिखरावासिन्, करुणामृतसागर । दीनबन्धो दयासिन्धो, पाहि मां परमेश्वर ॥ न मे बन्धुर्न मे मित्रं, त्वमेव मम सर्वदा । त्वमेव माता च पिता च, त्वमेव मम शङ्कर ॥ त्वमेव ज्ञानं भक्तिश्च, त्वमेव परमं पदम् । त्वमेव मे गतिर्नाथ, त्वमेव हृदि संस्थितः ॥ जन्मजन्मकृतं पापं, हर मे हर शङ्कर । भक्तिं देहि दृढां नाथ, चरणे तव शङ्कर ॥ *ॐ नमः शिवाय… ॐ नमः शिवाय…* *शिव शम्भो… शिव शम्भो…* --- नाथ त्वमेव शरणं मे, नाथ त्वमेव जीवनम् । नाथ त्वमेव मे बन्धुः, नाथ त्वमेव दैवतम् ॥ अज्ञानतिमिरं नाशय, ज्ञानदीपं प्रदीपय । मोहबन्धं विनिर्मोचय, शिवभक्तिं प्रयच्छ मे ॥ मनसि मे शिवनामास्तु, वचसि मे शिवकीर्तनम् । कर्मणि मे शिवसेवा स्यात्, जीवने शिवचिन्तनम् ॥ शम्भो शङ्कर विश्वेश, नीलकण्ठ सदाशिव । कृपादृष्टिं सदा देहि, पाहि मां परमेश्वर ॥ --- गङ्गाधराय सोमाय, उमाधवाय शम्भवे । भक्तप्रियाय देवाय, महादेवाय ते नमः ॥ रुद्राय रौद्ररूपाय, शान्ताय परमात्मने । विश्वनाथाय नाथाय, शिवाय सततं नमः ॥ पशुपतये नमस्तुभ्यं, भूतनाथाय ते नमः । दक्षयज्ञविनाशाय, कालकालाय ते नमः ॥ त्र्यम्बकाय त्रिनेत्राय, नीलकण्ठाय ते नमः । मृत्युञ्जयाय शर्वाय, सदाशिवाय ते नमः ॥ *हर हर महादेव… हर हर महादेव…* *ॐ नमः शिवाय… ॐ नमः शिवाय…* --- प्रदोषसमये देव, त्वत्पादाम्बुजसेवया । मम चित्तं स्थिरं भूयात्, मम भक्तिर्दृढा भवेत् ॥ दुःखानि मे विनश्यन्तु, रोगशोकभयं तथा । शिवकृपाप्रसादेन, सर्वमङ्गलमस्तु मे ॥ गृहे गृहे शिवनामास्तु, हृदये हृदये हरः । जिह्वायां शिवमन्त्रस्तु, सर्वदा शङ्करोऽवतु ॥ सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः । सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत् ॥ --- ॐ नमः शिवाय… ॐ नमः शिवाय… ॐ नमः शिवाय… शिवाय नमः… शम्भवे नमः… महेश्वराय नमः… सदाशिवाय नमः… हर हर महादेव… हर हर महादेव… हर हर महादेव… ॐ नमः शिवाय… ॐ नमः शिवाय… ॐ नमः शिवाय… --- *॥ चतुर्थ स्तुतिः ॥* शिवोऽहमिति भावेन, शिवनाम जपन् नरः । भवबन्धविनिर्मुक्तः, शिवलोकं स गच्छति ॥ शिवनामामृतं पीत्वा, शिवभक्त्या समन्वितः । अन्तःशुद्धिं परां प्राप्य, शिवसायुज्यमाप्नुयात् ॥ नमः पार्वतीनाथाय, नमः कैलासवासिने । नमः भक्तार्तिहन्त्रे च, नमः शम्भवे नमः ॥ उमासहित विश्वेश, मम हृदि निवास कुरु । अनाथनाथ हे शम्भो, मम जीवनं पावय ॥ --- यत्किञ्चित् पठितं स्तोत्रं, यत्किञ्चित् कीर्तितं मया । तत्सर्वं तव देवेश, चरणेषु समर्पितम् ॥ मन्त्रहीनं क्रियाहीनं, भक्तिहीनं महेश्वर । क्षमस्व परमेशान, कृपां कुरु सदाशिव ॥ त्वमेव शरणं नाथ, त्वमेव परमं बलम् । त्वमेव जीवनाधारः, त्वमेव मम केवलम् ॥ *ॐ नमः शिवाय…* *ॐ नमः शिवाय…* *ॐ नमः शिवाय…* --- *॥ अंतिम मंगलगान ॥* गुरुप्रदोषे महादेव, कृपां कुरु महेश्वर । भक्तानां हृदये नित्यं, वस शम्भो सदाशिव ॥ हर हर महादेव… हर हर महादेव… शिव शम्भो महादेव, शिव शम्भो महेश्वर । उमापते त्रिलोकेश, पाहि मां परमेश्वर ॥ ॐ नमः शिवाय… ॐ नमः शिवाय… ॐ नमः शिवाय… शिवं भवतु सर्वेषां, शान्तिर्भवतु सर्वदा । महादेवकृपया नित्यं, मङ्गलं भवतु ध्रुवम् ॥ *हर हर महादेव 🔱* *ॐ नमः शिवाय 🕉️* *ॐ नमः शिवाय 🕉️* *ॐ नमः शिवाय 🕉️*