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Bhaktamar Stotra Meaning | श्लोक 1 भक्तामर स्तोत्र | भव-सागर से पार कैसे हों?

Jain Parmarth

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Bhaktamar Stotra Meaning | श्लोक 1 भक्तामर स्तोत्र | भव-सागर से पार कैसे हों?

778 просмотров · 4 месяца назад
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#bhaktamarstotra #jainism #bhaktamar #acharyamanatung जय जिनेन्द्र! 🙏 'भक्तामर स्तोत्र' के इस पहले श्लोक की अलौकिक और आध्यात्मिक यात्रा में आपका स्वागत है। क्या आपने कभी सोचा है कि स्वर्ग के सबसे महान देव और इंद्र भी अपना मुकुट क्यों झुकाते हैं? इस वीडियो में हम सिर्फ श्लोक का अर्थ नहीं जानेंगे, बल्कि उस गहरे 'भाव' को महसूस करेंगे जो एक डूबते हुए इंसान को शांति और मुक्ति का किनारा दिखाता है। भक्तामर-प्रणत-मौलि-मणि-प्रभाणा- मुद्योतकं दलित-पाप-तमो-वितानम् । सम्यक्-प्रणम्य जिन पाद-युगं युगादा- वालम्बनं भव-जले पततां जनानाम् ।। अन्वयार्थ— (भक्त) भक्त (अमर) देवों के (प्रणत) नम्रीभूत (मौलि) मुकुटों के (मणि) मणियों की (प्रभाणाम्) कान्ति के (उद्योतकम्) बढ़ाने वाले (पाप) पाप रूपी (तमः) अन्धकार के (वितानम्) विस्तार के (दलित) नाशक (च) और (युगादौ) युग के प्रारम्भ में (भवजले) संसार समुद्र में (पतताम्) गिरते हुए (जनानाम्) प्राणियों के (आलम्बनम्) सहारा देने वाले (जिनपादयुगलम्) जिनेन्द्र भगवान् के दोनों चरणकमलों को (सम्यक्) भली भाँति (प्रणम्य) नमस्कार करके । इस श्लोक में आचार्य मानतुंग बताते हैं कि जब भक्ति से भरे हुए स्वर्ग के देवगण भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) के चरणों में पूरी श्रद्धा के साथ नतमस्तक होते हैं, तो उनके मुकुट में जड़ी बहुमूल्य मणियां भगवान के चरणों की दिव्य कांति पाकर और भी ज्यादा चमक उठती हैं। वह दिव्य प्रकाश इतना शक्तिशाली है कि वह हमारे जन्म-जन्मांतर के पापों और अज्ञानता के घने अंधकार को पल भर में नष्ट कर देता है। इस कर्म युग की शुरुआत में, संसार रूपी भयंकर और तूफानी समुद्र में डूबते हुए प्राणियों के लिए... जिनेन्द्र भगवान के चरण-कमल ही एकमात्र सच्चा सहारा (आलंबन) हैं। अगर आपको यह वीडियो पसंद आया हो और इसके भाव से आपके मन को शांति मिली हो, तो कृपया इस वीडियो को लाइक (Like) ज़रूर करें। अपने परिवार और दोस्तों के साथ इसे शेयर (Share) करके उन तक भी यह सकारात्मक ऊर्जा और भगवान की महिमा पहुँचाएँ। भक्तामर स्तोत्र के अगले श्लोकों की दिव्य यात्रा पर हमारे साथ चलने के लिए चैनल को सब्सक्राइब (Subscribe) करना न भूलें। जय जिनेन्द्र! 🙏 In this video, we dive deep into the profound essence of the first Shloka of the Bhaktamar Stotra. Acharya Manatunga beautifully describes how the devoted heavenly gods (Indras) bow before Lord Adinath. As they bow, the divine radiance of the Lord's feet intensifies the glow of the precious jewels in their crowns. This powerful divine light instantly shatters and destroys the thick darkness of our sins and ignorance. For souls who are drowning in the turbulent, stormy ocean of worldly life (the cycle of birth and death), the Lord's lotus feet are the ultimate anchor and the only true path to salvation.If you found peace and spiritual value in this video, please give it a Like. Spread the positivity and divine message by Sharing this video with your family and friends. Don't forget to Subscribe to our channel and hit the bell icon so you can join us on the journey through the upcoming Shlokas of the Bhaktamar Stotra. Jai Jinendra! 🙏