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मंत्री जी का बहाना vs जमीनी हकीकत! नक्सलवाद का बहाना छोड़िए, SP-कलेक्टर से पूछ लीजिए!"

Public Reporting

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मंत्री जी का बहाना vs जमीनी हकीकत! नक्सलवाद का बहाना छोड़िए, SP-कलेक्टर से पूछ लीजिए!"

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दोस्तों, मंच से किए जाने वाले विकास के दावों और बस्तर की जमीनी हकीकत में कितना फर्क है, यह आपको इस वीडियो में देखने को मिलेगा। जगदलपुर में पत्र सूचना कार्यालय (PIB) द्वारा आयोजित 'वार्तालाप' कार्यक्रम में केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्यमंत्री श्री तोखन साहू जी पहुंचे थे। कार्यक्रम का विषय था 12 साल का विकास, लेकिन जब मैंने बस्तर की वास्तविक समस्याओं को लेकर उनसे सीधे सवाल किए, तो सरकार के दावों की पोल खुल गई। मैंने मंत्री जी से 3 प्रमुख सवाल पूछे: 1. पेयजल संकट: जल जीवन मिशन (नल-जल योजना) के अधूरे काम और बस्तर में पीने के पानी की भारी समस्या। 2. शिक्षा की बदहाली: प्राथमिक स्कूलों की जर्जर हालत और एकल-शिक्षक (Single Teacher) के भरोसे चल रहे स्कूल। 3. कर्मचारियों का शोषण: एक तरफ 'गुलामी प्रथा' खत्म करने के दावे, वहीं दूसरी तरफ राज्य में हजारों दैनिक वेतनभोगी (Daily Wages) और संविदा कर्मचारियों का कम वेतन में काम करना। नक्सलवाद का बहाना और करारा जवाब: जब मंत्री जी ने इन समस्याओं का ठीकरा "नक्सलवाद" पर फोड़ने की कोशिश की, तो मैंने भरे मंच पर उन्हें आईना दिखा दिया। मैंने मंच पर बैठे SP और कलेक्टर का हवाला देते हुए कहा कि जगदलपुर से 20-30 किलोमीटर के सुरक्षित दायरे में आखिर कौन से नक्सली हैं, जो नल-जल योजना और स्कूलों को रोक रहे हैं? वीडियो को अंत तक देखें और खुद तय करें कि क्या बस्तर के विकास को अब भी केवल बहानों के पीछे छुपाया जा रहा है? वीडियो पसंद आए तो इसे LIKE करें, अपने दोस्तों के साथ SHARE करें और ऐसी ही जमीनी और बेबाक पत्रकारिता के लिए चैनल को SUBSCRIBE जरूर करें। आपकी इस मुद्दे पर क्या राय है? क्या आपको भी लगता है कि विकास के दावों में नक्सलवाद का बहाना अब पुराना हो गया है? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर दें!