इंडिया गेट के पीछे छिपा सच: 70,000 सैनिकों का अधूरा हिसाब|Itiha 360|
Itihas 360
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इंडिया गेट के पीछे छिपा सच: 70,000 सैनिकों का अधूरा हिसाब|Itiha 360|
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इंडिया गेट के पीछे छिपा सच: 70,000 सैनिकों का अधूरा हिसाब🇮🇳
10 फरवरी 1921 को नई दिल्ली में एक नींव का पत्थर रखा गया। उसके ऊपर जो स्मारक उठा, उसे आज पूरी दुनिया इंडिया गेट के नाम से जानती है। लेकिन इसकी कहानी दिल्ली से नहीं, पहले विश्व युद्ध के उन मैदानों से शुरू होती है जहाँ लगभग तेरह लाख भारतीय सैनिक लड़ने गए थे।
इस वीडियो में हम जानेंगे कि इंडिया गेट क्यों बना, इसे किसने डिज़ाइन किया, इसकी दीवारों पर किन सैनिकों के नाम खुदे हैं, और आज़ादी के बाद इस जगह का मतलब कैसे बदलता गया। खुदादाद ख़ान की कहानी से लेकर अमर जवान ज्योति, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक और कर्तव्य पथ तक, यह सौ साल का पूरा सफ़र है। और अंत में एक ऐसा अधूरा हिसाब, जो आज भी पत्थर पर दर्ज है।
इस वीडियो में क्या है:
0:00 नींव का पत्थर, 10 फरवरी 1921
0:24 पहला विश्व युद्ध और भारतीय सैनिक
1:01 खुदादाद ख़ान, विक्टोरिया क्रॉस पाने वाले पहले भारतीय
1:50 ऑल इंडिया वॉर मेमोरियल का फ़ैसला
2:24 एडविन लुटियंस और स्मारक का डिज़ाइन
3:07 दीवारों पर खुदे नाम
3:29 दस साल का निर्माण और नई दिल्ली की सीधी रेखा
4:07 12 फरवरी 1931, उद्घाटन
4:21 इस स्मारक की विडंबना
4:42 आज़ादी के बाद का इंडिया गेट
4:59 खाली छतरी और किंग जॉर्ज पंचम की मूर्ति
5:24 1971 का युद्ध और अमर जवान ज्योति
6:38 राष्ट्रीय युद्ध स्मारक, 2019
7:08 2022: ज्योति का विलय, नेताजी की प्रतिमा और कर्तव्य पथ
7:54 आज का इंडिया गेट
8:25 पत्थर पर दर्ज अधूरा हिसाब
इस वीडियो की ख़ास बातें:
इंडिया गेट की ऊँचाई लगभग 42 मीटर है। इसमें भरतपुर का लाल बलुआ पत्थर और ग्रेनाइट लगा है। दीवारों पर लगभग तेरह हज़ार तीन सौ नाम दर्ज हैं, जबकि पहले विश्व युद्ध में लगभग सत्तर हज़ार भारतीय सैनिकों ने जान गँवाई थी।
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