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Guruvariya | Guru Geet | Desk of Manojbhai Rathore | Jatin Bid

Jatin Bid [ JB-Muzik ]

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Guruvariya | Guru Geet | Desk of Manojbhai Rathore | Jatin Bid

810 просмотров · 1 месяц назад
Jatin Bid [ JB-Muzik ]
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A new Guru - Shishya Song from Sarva Virti Vrindaavan “Guruvariyaa” Depicting the sacred and joyful moments of Diksha Vastra Rangotsav, this song weaves together Mangal Geet, Sanjhi, Mehandi and the graceful Rajasthani Ghumar. A celebration of renunciation wrapped in the colors of tradition. Mumukshu Virti Mahendraji Khivensara k Diksha nimitt New Jain Devotional Diksha Song 2026 | Virti Ra Avsar | Virti Diksha Special On the auspicious occasion of “Sarva Virti Vrindaavan” - Mumukshu Virti’s Diksha at Shankeshwar Mahatirth we present this soulful stavan dedicated to Every Bhakt & Diksharthi. Every line of the song comes alive through detailed AI visuals, helping you truly feel the depth and bhav of each word. May it inspire Bhakti, vairagya and deepen our connection with Parmatma... From The Desk of : Manoj Rathore Lyrics & Concept : Ankit Shah Singer: Jatin Bid Backing Vocals : DSP Group, Pune Music: HardikPasad Video : Parmeshwar Studio भीना भीना भावो वाळा, व्हाली व्हाली वाणी वाळा, तारा संगे रहेवानी रढ रे लागी...(2) हो आत्मार्थी, ने परमार्थी, तारी कने रहेवानी रढ रे लागी... हो आत्मार्थी, ने परमार्थी, तारी कने रहेवानी रढ रे लागी... सुणुं हुं तत्त्व वाणी, थई जाउं पाणीपाणी, केवी तारी करुणा वरसे... संसारथी हुं छटकी, भवभ्रमणाओथी अटकी, साची राहे आतम तरसे... गुरुमैया, रखवैया, छो मुज जीवनना खेवैया, तारी कृपाए भींजावुं, तारा रंगोमां रंगावुं, तारा चरणे रहेवा चाहुं, बीजुं बधुं छे नकामुं, साचा सुखनुं सरनामुं, तारा शरणे रहेवा चाहुं, भीना भीना..... हो... विरतिना वृंदावनमां , विरतिना वृंदावनमां रहेवाना अवसरीया, आव्या रे अवसरीया, महाभिनिष्क्रमण केरा, मिठुड़ा मधुवनमां, रहेवाना अवसरीया, आव्या रे अवसरीया.. मारा आतमने निरखी, अंतरना भावो परखी, आपो मने सर्वविरति... ओघो लेवाने काजे, तनमन आ मारुं नाचे, मांगुं छुं हुं सर्वविरति... गुरुवरीया, सूरिवरीया, मधमीठा तमे दरिया, शुद्ध संयमने पामी, थावुं मारे अनुगामी, हवे बनवाने निष्कामी... प्रिय प्रितमने पामी, नामी मटीने अनामी, अंकित थाउं मुक्तिगामी... भीना भीना .... ॥ श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथाय नमः ॥ ॥ योगनिष्ठ श्री बुद्धि-अजित-ऋद्धि-कीर्ति-कैलास-सुबोध-मनोहर-कल्याण-पद्मसागरसूरीश्वरभ्यो नमः ॥ धर्म नगरी चेन्नई निवासी धर्मनिष्ठा संघवी हर्षा - महेंद्रकुमार खिवेंसरा की सुपुत्री मुमुक्षु विरती कुमारी का आस्थातीर्थ श्री शंखेश्वर महातीर्थ में "सर्व विरती वृंदावन" प्रवेशोत्सव दीक्षा दिन : निज ज्येष्ठ शुक्ल १३ - दि. 27.6.2026 शनिवार सर्वविरती प्रदाता : प.पू. जापनिष्ठ, समतानिधान, षष्ठम् वर्षीतप आराधक आचार्यदेव श्री वर्धमानसागरसूरीश्वरजी म.सा. आदि सूरि पदस्थ श्रमण श्रमणी परिवार वृंदावन संरक्षक : पू. सा. श्री सूर्यलताश्रीजी म.सा. की शिष्या सा.श्री शिलपूर्णाश्रीजी म.सा. की शिष्या सा. श्री सम्यग्दर्शिताश्रीजी म.सा. के प्रशिष्या सा. श्री वीतरागदर्शिताश्रीजी म.सा. "नूतन नाम : पूज्य साध्वीजी श्री विराज्ञा दर्शिताश्रीजी म.सा." Song Presented by : मुमुक्षु विरतीकुमारी के दीक्षा निमित्त स्व. संघवी सुगंधीबाई शांतिलालजी खिवेंसरा परिवार संघवी महेंद्रकुमार शांतिलालजी खिवेंसरा परिवार संघवी रितेश, अंकुश, अक्षय, प्रथम, माहिर आदि समस्त खिवेंसरा परिवार (चडुआल - राजकोट - चेन्नई)