मैं दालमंडी हूं.. दाल,अतर,घंघरु और मुजरा से लेकर बुलडोजर तक, Dalmandi. बनारस का विकास
Ekbargi
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मैं दालमंडी हूं.. दाल,अतर,घंघरु और मुजरा से लेकर बुलडोजर तक, Dalmandi. बनारस का विकास
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Ekbargi
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नमस्ते दोस्तों!
"मैं दालमंडी हूँ..."
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बनारस (वाराणसी) की तंग गलियों में बसा एक ऐसा बाज़ार, जिसने वक़्त के बदलते रंगों को बहुत करीब से देखा है। कभी दालों के व्यापार से शुरू हुई इसकी पहचान, फिर संगीत की महफ़िलों से होती हुई गुलज़ार मार्केट तक पहुँची और अब विकास का नया अध्याय शुरू हुआ । उसी के संबंध में यह वीडियो है।
इस वीडियो के माध्यम से दालमंडी खुद अपनी जुबानी अपना इतिहास, यादें वर्तमान स्थिति आपके साथ साझा कर रही है। इसमें दर्द भी है और अच्छे भविष्य की उम्मीद भी है।
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हमने तथ्यपूर्ण जानकारी देने की चेष्टा की है। मानवीय भूल के कारण कोई त्रुटि संभव है।
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स्रोत: कुछ तथ्य पीडब्ल्यूडी, स्थानीय लोग
डाॅ मोतीचंद की किताब- काशी का इतिहास ,स्थानीय अखबार
कुछ चित्र: एआई
Anirudh pandey
photoani.pandey@gmail.com
susuwahni Varanasi