Lalbaug Rajachi Aarti | Lalbaugcha Raja Song | Ganesh Chaturthi Song | Lalbaugcha Raja Aarti
Shemaroo Bhakti
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Lalbaug Rajachi Aarti | Lalbaugcha Raja Song | Ganesh Chaturthi Song | Lalbaugcha Raja Aarti
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Experience the grand divine darshan, boundless blessings, and electrifying energy of Mumbai's King with the sacred devotional prayer, "Lalbaug Rajachi Aarti". Dedicated to Navsacha Ganpati Lalbaugcha Raja, this powerful Ganesh Chaturthi song purifies your home, removes all obstacles, and fills your soul with pure positive vibrations, devotion, and festive joy.
Listening to and singing the Aarti of Lalbaugcha Raja regularly invites auspiciousness and spiritual protection into your household. Revered as the fulfiller of all genuine wishes (Navsacha Ganpati), Raja's benevolent grace removes life hurdles, relieves stress and anxiety, and blesses devotees with success, good fortune, and prosperity.
Spiritual Significance & Meaning:
Lalbaugcha Raja represents the supreme embodiment of hope, faith, and unconditional surrender. Offering Aarti to the King of Lalbaug symbolizes burning away the darkness of ignorance, ego, and difficulties, welcoming divine wisdom, courage, and auspicious beginnings into every aspect of life.
May Lalbaugcha Raja remove every hurdle from your life and bless you and your family with boundless health, joy, and prosperity. Ganpati Bappa Morya!
Track Name – Lalbaug Rajachi Aarti
Singer - Lalbaugcha Raja Aarti Samuha (Nilesh Shelar, Aakash Bhosale, Sameer Ghatkar, Bhavesh Thorat, Pranit Wadkar, Aniket Kolte)
Music composer - Abhijit Joshi
Lyrist : Traditional
Arranger - Ganesh Satardekar
Audio recordist - Avdhoot Wadkar (Ajivasan studio)
Label: Times Music Spiritual
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Lyrics
सुखकर्ता दुःखहर्ता वार्ता विघ्नाची।
नुरवी पुरवी प्रेम कृपा जयाची।
सर्वांगी सुंदर उटी शेंदुराची।
कंठी झळके माळ मुक्ताफळांची॥
जय देव जय देव, जय मंगलमूर्ति।
हो श्री मंगलमूर्ति।
दर्शन मात्रे मनःकामना स्फूर्ति॥
जय देव जय देव॥
रत्नखचित फरा तुज गौरीकुमरा।
चंदनाची उटी कुमकुम केशरा।
हिरेजडित मुकुट शोभतो बरा।
रुणझुणती नूपुरे चरणी घागरियाँ॥
जय देव जय देव॥
लंबोदर पीतांबर फणिवर वंदना।
सरळ सोंड वक्रतुंड त्रिनयना।
दास रामाचा वाट पाहे सदना।
संकटी पावावे, निर्वाणी रक्षावे, सुरवर वंदना॥
जय देव जय देव॥
श्री शंकर आरती
लवथवती विक्राळा ब्रह्मांडी माळा।
विषे कंठ काळा त्रिनेत्री ज्वाळा।
लावण्यसुंदर मस्तकी बाळा।
तेथुनिया जळ निर्मळ वाहे झुळझुळा॥
जय देव जय देव, जय श्रीशंकर।
हो स्वामीशंकर।
आरती ओवाळू, आरती ओवाळू तुज कर्पूरगौरा।
जय देव जय देव॥
कर्पूरगौरा भोळा, नयनी विशाळा।
अर्धांगी पार्वती सुमनांच्या माळा।
विभूतीचे उधळण शीतिकंठ नीळा।
ऐसा शंकर शोभे उमावेल्हाळा॥
जय देव जय देव, जय श्रीशंकर।
हो स्वामीशंकर।
आरती ओवाळू, आरती ओवाळू तुज कर्पूरगौरा।
जय देव जय देव॥
देवी दैत्य सागरमंथन पै केले।
त्यामाजी अवचित हलाहल जे उठले।
ते त्वां असुरपणे प्राशन केले।
नीलकंठ नाम प्रसिद्ध झाले॥
जय देव जय देव, जय श्रीशंकर।
हो स्वामीशंकर।
आरती ओवाळू, आरती ओवाळू तुज कर्पूरगौरा।
जय देव जय देव॥
व्याघ्रांबर फणिवरधर सुंदर मदनारी।
पंचानन मनमोहन मुनीजनसुखकारी।
शतकोटीचे बीज वाचे उच्चारी।
रघुकुलतिलक रामदासा अंतरी॥
जय देव जय देव, जय श्रीशंकर।
हो स्वामीशंकर।
आरती ओवाळू, आरती ओवाळू तुज कर्पूरगौरा।
जय देव जय देव॥
श्री दुर्गा देवी आरती
दुर्गे दुर्गट भारी तुजविण संसारी।
अनाथनाथे अंबे, करुणा विस्तारी।
वारी वारी जन्म-मरणाते वारी।
हारी पडलो आता, संकट निवारी॥
जय देवी जय देवी, महिषासुरमर्दिनी।
सुरवर ईश्वर वरदे, तारक संजीवनी।
जय देव जय देव॥
तुजविण भुवनी पाहता तुज ऐसे नाही।
चारी श्रमले परंतु न बोलवे काही।
साही विवाद करिता पडिले प्रवाही।
ते तू भक्तालागी पावसि लवलाही॥
जय देवी जय देवी, महिषासुरमर्दिनी।
सुरवर ईश्वर वरदे, तारक संजीवनी।
जय देव जय देव॥
प्रसन्न वदने प्रसन्न होसी निजदासा।
क्लेशापासून सोडवी, तोडी भवपाशा।
अंबे तुजवाचून कोण पुरवील आशा।
नरहरी तल्लीन झाला पदपंकजलेशा॥
जय देवी जय देवी, महिषासुरमर्दिनी।
सुरवर ईश्वर वरदे, तारक संजीवनी।
जय देव जय देव॥
घालीन लोटांगण
घालीन लोटांगण, वंदिन चरण।
डोळ्यांनी पाहिन रूप तुझे।
देवा प्रेमे आलिंगन, आनंदे पूजिन।
भावे ओवाळीन, म्हणे नामा॥
॥ १ ॥
त्वमेव माता च पिता त्वमेव।
त्वमेव बंधुश्च सखा त्वमेव।
त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव।
त्वमेव सर्वं मम देवदेव॥
॥ २ ॥
कायेन वाचा मनसेंद्रियैर्वा।
बुद्ध्यात्मना वा प्रकृतिस्वभावात्।
करोमि यद्यत् सकलं परस्मै।
नारायणायेति समर्पयामि॥
॥ ३ ॥
अच्युतं केशवं रामनारायणम्।
कृष्णदामोदरं वासुदेवं भजे।
श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभम्।
जानकीनायकं रामचंद्रं भजे॥
॥ ४ ॥
हरे राम महामंत्र
हरे राम हरे राम,
राम राम हरे हरे।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण,
कृष्ण कृष्ण हरे हरे॥
॥ १ ॥
गणपति जयघोष
मोरया रे बाप्पा मोरया रे!
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