बेटी ने अस्पताल में जो कागज़ रखा, उसे देखकर मेरे पैरों तले ज़मीन खिसक गई!
ब्रैडली की कहानियाँ
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बेटी ने अस्पताल में जो कागज़ रखा, उसे देखकर मेरे पैरों तले ज़मीन खिसक गई!
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जिस बेटी को मैंने अपनी पूरी ज़िंदगी की खुशियाँ देकर बड़ा किया, उसी बेटी ने उस दिन मुझे अकेला छोड़ दिया, जब मुझे उसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी। 67 साल की उम्र में एक हादसे ने मुझे अस्पताल पहुँचा दिया। मेरी कूल्हे की हड्डी टूट चुकी थी, दर्द असहनीय था और मुझे उम्मीद थी कि मेरी बेटी नंदिनी मेरे पास आएगी। लेकिन उसके जवाब ने मेरा दिल तोड़ दिया।
मैंने उस दिन एक ऐसा फोन किया, जिसके बारे में मेरी बेटी और दामाद विक्रम को कोई जानकारी नहीं थी। मुझे अंदाज़ा भी नहीं था कि मेरे अपने ही लोग मेरी 18 एकड़ पुश्तैनी ज़मीन और ज़िंदगी भर की मेहनत के पीछे पड़े हैं। कुछ पुराने कागज़, एक संदिग्ध मुख्तारनामा और मेरी दिवंगत पत्नी की वसीयत ने ऐसा सच सामने ला दिया, जिसकी मैंने कभी कल्पना नहीं की थी।
अस्पताल में बीते उन 6 दिनों ने मेरे परिवार की असली तस्वीर दिखा दी। लेकिन जब मेरी बेटी और दामाद एक तीसरे व्यक्ति के साथ मेरे कमरे में पहुँचे, तो उन्हें पता नहीं था कि इस बार कहानी का अंत उनकी उम्मीद के मुताबिक नहीं होने वाला था।
यह कहानी एक पिता के दर्द, पारिवारिक धोखे, बुज़ुर्ग माता-पिता के सम्मान, पुश्तैनी संपत्ति, ज़मीन के कागज़ात और रिश्तों में टूटते भरोसे की भावुक कहानी है।
आपकी नज़र में क्या नंदिनी को अपने पिता की माफ़ी मिलनी चाहिए थी? या फिर एक बार टूटा हुआ भरोसा दोबारा नहीं करना चाहिए? अपनी राय कमेंट में ज़रूर बताइए।
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