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श्री गुरुगीता । सद्गुरु श्री विजय श्री भगवान के मुखारविंद से निस्सृत भावामृत। Ramlal Dham Jhansi

Ramlal Dham Jhansi

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श्री गुरुगीता । सद्गुरु श्री विजय श्री भगवान के मुखारविंद से निस्सृत भावामृत। Ramlal Dham Jhansi

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Ramlal Dham Jhansi
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हमारे आदिगुरु हिमालय के अजर अमर योगीश्वर महाप्रभु रामलाल भगवान जो सिद्धयोग के सूत्र प्रवर्तक हैं व योगेश्वर चन्द्रमोहनजी महाराज द्वारा इस योग विद्या का प्रसार धराधाम पर हुआ।इसी सिद्धयोग धारा का संवर्धन सद्गुरुदेव श्री विजय श्री द्वारा सिद्ध योग मार्तण्ड पीठ महाप्रभु रामलाल धाम झाँसी से किया जा रहा है। गुरु-शिष्य परंपरा का अनुपम ग्रंथ श्री गुरुगीता का सदगुरुदेव श्री विजय श्री भगवान के मुखारविंद से निस्सृत यह अमृतधारा हम शिष्यों के लिए हृदय गीत है। गीतों की गूँज हमेशा हृदय के आँगन में ही अंकुरित होती है। सदगुरुदेव भगवान की परम भावपूर्ण गुरुमय वाणी हम भक्तों के हृदय को गुरुभक्ति जल से अभिसिंचित कर रही है।श्री गुरु गीता ज्ञान का परम स्रोत है। इसका श्रवण करने वाला व्यक्ति अवश्य ही गुरु भक्त एवं सद्गुरु तत्व को समझने वाला बन जाता है।