जानिए धार किले का पूरा इतिहास | परमार राजाओं और मोहम्मद बिन तुगलक | History Of Dhar Fort M P
Saurabh Sarraf
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आईए जानते हैं मध्य प्रदेश के खूबसूरत शहर धार में स्थित धार के किले के बारे में । इस किले से एक नहीं कई बल्कि कई राजवंशों की कहानी जुड़ी हुई है। साथ ही साथ यह किला 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में भी क्रांतिकारी गतिविधियों का केंद्र रहा ।
धार शहर के ही भीतर स्थित है किला धार का किला कहलाता है। मिनी मुंबई कहे जाने वाले इंदौर से यह शहर केवल 63 किलोमीटर की दूरी पर है। और यहां से ऐतिहासिक शहर महेश्वर भी लगभग 67 किलोमीटर की दूरी पर है ।
वैसे मूल रूप से इस किले को परमार वंश के राजा भोज देव ने 1010 ई. से सन 1055 ई. के बीच बनवाया था। यह किला उसे समय पर धारागिरी लीलोद्यान’ के नाम से जाना जाता था। इस किले पर कई परमार राजाओं की कहानी इसके लिए से जुड़ी हुई है। परमार शासको द्वारा बनवाई गई सीढ़ी नुमा बावड़ी आज भी किले में मौजूद है।
1296 ने ई से 1316 ई तक दिल्ली के सिंहासन पर अलाउद्दीन खिलजी बैठा था । खिलजी के सेनापति एनुअल मुल्क मुल्तानी ने मलवा पर आक्रमण कर दिया और उसे समय परमार शासक महलदेव की हत्या कर दी । इस तरह परमार वंश का अंत हो गया। फेस किले पर कई बार आकर जिस कारण से तबाह हो गया था।
तुगलक वंश का दूसरा शासक मोहम्मद बिन तुगलक जिसने 1325 ई से 1351 ई तक शासन किया। इतिहास जिसे सनकी, पागल और स्वप्नशील कहता है।
मोहम्मद बिन तुगलक दौलताबाद से दिल्ली की ओर जा रहा था इसी दौरान वह कुछ महीने इस किले मे रुका।1344 ई के आसपास उसने इस किले की मरम्मत करवाई गई और कई दुर्ग, महल जैसी अलग-अलग संरचनाओं का निर्माण करवाया गया।
यह किला एक आयताकार संरचना वाली पहाड़ी पर बना हुआ है। इस किले को बनाने में लाल बलुआ पत्थरों का उपयोग किया गया था। इस किले में हिंदू, इस्लामी और अफगानी स्थापत्य शैली का मिश्रण दिखाई पड़ता है। और यह किला लगभग 60 मीटर ऊंचा है।
किले के भीतर एक महल है जिसका नाम खरबूजा महल है क्योंकि इसका आकार खरबूजे के जैसा है।
किले के भीतर खरबूजा महल के अलावा शीश महल और विश्राम भवन भी है।
इस किले से जुड़ी सबसे रोचक बात यह है की 1775 ई. में पेशवा बाजीराव द्वितीय का जन्म इसी किले में हुआ था । 1857 जब स्वतंत्रता संग्राम की लहर भारतवर्ष में व्याप्त थी तब यह किला भी क्रांतिकारी गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था। स्वतंत्रता सेनानियों ने चार महीना तक इस किले पर कब्जा कर किया था। 6 दिनों तक अंग्रेजों ने इस किले पर लगातार बमबारी की लेकिन सभी स्वतंत्रता सेनानी एक खुफिया रास्ते से इस किले से जा चुके थे।
किले के एक द्वार पर औरंगजेब के शासन के समय की और शाहजहां के सौतेले भाई असगर बैग के प्रशासन के दौरान का एक शिलालेख मौजूद है।
औरंगजेब और दारा शिकोह के बीच युद्ध हुआ था तब युद्ध में हार के दारा शिकोह ने इस किले में ही शरण लिया था।
आज के समय में यह किला खंडहर के रूप में है। हालांकि प्रशासन के द्वारा समय समय पर किले की मरम्मत कराई गई है।
धार का किला अपने आप में भारत के इतिहास और संस्कृति को सजोए हुए है। ना जाने कितने राजवंशों की कहानी इस किले में आज भी बंद है ।
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