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खत्री कौन हैं ,कहाँ से आए ,व्यापारी कैसे बन गए ?/History of Khatri caste

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खत्री कौन हैं ,कहाँ से आए ,व्यापारी कैसे बन गए ?/History of Khatri caste

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‪@aloksandesh‬ खत्री पंजाबी व्यापारिक जाति हैं. ये क्षत्रिय होने का दावा करते हैं. खत्री शब्द, संस्कृत के 'क्षत्रिय' शब्द से बना है. पंजाबी में 'क्ष' को 'ख' उच्चारित किया जाता है. इसी वजह से 'क्षत्रिय' शब्द, 'खत्री' बन गया खत्री जाति व्यापारी समुदाय है | 1947 मे भारत -पाकितान बटवारे के फलस्वरूप इस समुदाय के लोग भारत मे विभिन्न राज्यों आकर बस गए। खत्री समुदाय की जानकारी के प्रमुख बिन्दु इस प्रकार हैं -खत्री समुदाय की उत्पत्ति पंजाब में हुई थी. खत्री समुदाय के लोग व्यापार करते हैं. ऐतिहासिक रूप से, खत्री अफ़ग़ानिस्तान और मध्य एशिया के रास्ते भारतीय उपमहाद्वीप में व्यापार करते थे. खत्री समुदाय के लोग, सरकारी अधिकारी भी होते हैं. खत्री समुदाय के कई उपनाम हैं, जैसे कपूर, खन्ना, मल्होत्रा, बेदी, गुजराल, कोहली, सूरी, चड्ढा, साहनी वगैरह. खत्री समुदाय के कई प्रकार होते हैं, जैसे ढाई घर के खत्री, बारह घर के खत्री, बावनजाही खत्री, खुखरायन खत्री, भाटिया खत्री, सूद खत्री, ब्रह्मक्षत्रिय खत्री वगैरह. खत्री समुदाय के लोग, हिमाचल के औद्योगिक घरानों में भी शामिल हैं. खत्री जाति के लोगों के गोत्र कई जानकारी इस प्रकार है - मलहोत्रा, महरोत्रा, कपूर, खन्ना, खुराना, पुरी, सूद, सूरी, मेहता सेठ, सेठी, चावला, गुलाटी, चढ्ढा, चट्टा, बिन्द्रा, मुख्खी, सिक्का, मुन्जाल, मुद्गिल, नागपाल, सरधाना, जावा, बहल, साहनी, वैद, आनन्द, मोहन, कोहली, कात्याल, मलिक, हाण्डा, होरा, ढाण्डा, दूवा, सचदेवा, टंडन, नन्दा, धूपिया, चोपड़ा, धोपड़ा, घई, सिब्बल, दत्त या दत्ता, रेखी, लेखी, जेटली, सरीन, पाहवा, बजाज, कथूरिया, खजूरिया, छाबड़ा, जौहर, जौहल, सोढी, ग्रोवर, भाटिया, भट्टल, बक्सी, सहगल, दुग्गल, मनोचा, मनचंदा, चंदोक, मधोक, बत्रा, खेड़ा, ओबराय, स्वराज, सबरवाल, कक्कड़, मक्कड़, धींगड़ा, वाधवा, बढेरा, महता, विज, शोहरी, मुन्द्रा, कुन्द्रा, मदान, खट्टर, वोहरा, खुल्लर, छिब्बर, चुग, उप्पल, तिरखा, तलवार, भल्ला, ढल्ला, धीर, वासन, भसीन, बाली, डांग, चंदा, चानना, खेमका, खासा, पसरीजा, वाही, राही, शाही, नरूला, बावा, वालिया, नय्यर, कौशल, कोचर, सच्चर, कालरा, भान, भतग, जगत, बेदी, थापर, गुजराल, गुलजार, अधलखा, नारंग, धवन, तुली, लूथरा, मेहरा, बेदी, दीवान, सेतिया, मिड्ढा, मरवाह, खोसला, मैनी, घेरा, हाड़ा, कपिला, जग्गा, लाल, रूंगटा, टमटा, बेरी, पोपली, रतड़ा, खासा व सारदा आदि-आदि। अपवाद के तौर पर कुछ गोत्र जाट और दूसरी जातियों में भी है जैसे कि मलिक, ढांडा, मेहरा, गुजराल व उप्पल आदि | खत्रियों का मूल स्‍थान सारस्‍वत प्रदेश है और आजतक इस प्रदेश के सारस्‍वत ब्राह्मणों तथा खत्रियों में खान पान का जो पारस्‍परिक संबंध है , वैसा भारत के किसी प्रदेश के ब्राह्मण का किसी दूसरी जाति के साथ नहीं है . खत्री धर्म और संसकृति के आधार पर वेदों को मानने वाली धर्म निष्‍ठ जाति है। खत्री मुख्‍य रूप से शक्ति के उपासक हैं। सभी खत्री किसी न किसी नाम से शक्ति की पूजा करते हैं , शक्ति की पूजा करते हैं , शक्ति ही उनकी कुल देवी है। वैसे ये गणपति , शिव , सूर्य , शक्ति और विष्‍णु सभी को मानते और उपासना करते हैं। खत्री धार्मिक और सांस्‍कृतिक दृष्टि से परंपरावादी है। वे शास्‍त्रो में वर्णित नैमित्तिक कर्मों संस्‍कार आदि का पूर्ण पालन करते हैं। भाषा और बोली में अंतर होने के कारण संस्‍कारों के नाम बदल दिए गए हैं। परंतु हर जगह सभी संस्‍कार अरोये , भोडे , देवकाज और मुंछन , यज्ञोपवीत तथा विवाह आदि किए जाते हैं। भारत के समस्‍त सूर्यवंशी खत्रियों का मूल गोत्र कश्‍यप है . Disclaimer: इस content में दी गई जानकारी Internet sources, Digital News papers, Books और विभिन्न धर्म ग्रंथो के आधार पर ली गई है. Content को अपने बुद्धी विवेक से समझे