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गीता अध्याय 3 श्लोक 36–37 | न चाहते हुए भी मनुष्य पाप क्यों करता है? | हिंदी अर्थ

Bhaktidhamsongs

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गीता अध्याय 3 श्लोक 36–37 | न चाहते हुए भी मनुष्य पाप क्यों करता है? | हिंदी अर्थ

84 просмотра · 8 дн. назад
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मनुष्य सही और अनुचित का ज्ञान होते हुए भी कभी पाप की ओर क्यों खिंच जाता है? गीता अध्याय 3 के श्लोक 36–37 में अर्जुन यही गहरा प्रश्न पूछते हैं और भगवान श्रीकृष्ण काम तथा क्रोध को भीतर का वास्तविक शत्रु बताते हैं। इस वीडियो में काम का व्यापक अर्थ, रजोगुण से उसका संबंध, बाधित कामना का क्रोध में बदलना और “महाशन” अर्थात कभी तृप्त न होने वाली भूख को सरल हिंदी में समझाया गया है। राजा ययाति का प्रमाणित महाभारत-प्रसंग भी इस सत्य को उजागर करता है। अपने क्रोध के पीछे छिपी अपेक्षा को पहचानना भीतर के शत्रु को पहचानने की शुरुआत है। जय श्रीकृष्ण।