मूल वचन और मूल मन्त्र का भाव! @shrirajanswami
SPJIN
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प्रणाम सुंदर साथ जी, ! 🙏
आज के इस विशेष प्रवचन में 'मूल वचन' (Mul Vachan) और 'मूल मंत्र' (Mul Mantra) के गहन और सूक्ष्म भेद को तारतम वाणी (Tartam Vani) के आलोक में बहुत ही सरल और स्पष्ट रूप से समझाया गया है।
अक्सर समाज में मूल मंत्र और मूल वचन को लेकर अनेक भ्रांतियां और विवाद देखने को मिलते हैं। इस वीडियो में वाणी की प्रसिद्ध चौपाई—
👉 "श्री सुंदर बाई के चरण पसाए, मूल वचन हृदय चढ़ाए"
के माध्यम से यह प्रकट किया गया है कि परमधाम के मूल वचन का वास्तविक अर्थ क्या है और आत्मा की जागनी के लिए इसकी क्या आवश्यकता है।
📌 इस प्रवचन के मुख्य बिंदु
मूल वचन vs मूल मंत्र: दोनों का वास्तविक अर्थ क्या है और वाणी में मूल शब्द का किस संदर्भ में प्रयोग हुआ है?
श्री सुंदर बाई (श्यामा जी) की कृपा: श्यामा जी के चरण कमलों की कृपा से परमधाम के मूल वचनों की स्मृति कैसे होती है?
तारतम ज्ञान का विस्तार: तारतम बीज वचन और महामती श्री प्राणनाथ जी के माध्यम से अवतरित वाणी का गूढ़ रहस्य।
चारों ग्रंथों का महत्व: खिलवत, परिक्रमा, सागर और श्रृंगार वाणी को आत्मसात किए बिना आत्मा की जागनी क्यों असंभव है?
चित्रवनी और युगल स्वरूप की पहचान: केवल मंत्रकांड या विवादों में उलझने के बजाय युगल किशोर स्वरूप के ध्यान और प्रेम का महत्व।
चौपाई चिंतन:
"श्री सुंदर बाई के चरण पसाए, मूल वचन हृदय चढ़ाए। चरण फले निधि आई अब ना छोड़ूं चित चरण स्नेह॥"
इस चौपाई को यदि सुंदर साथ अपने जीवन में आत्मसात कर ले, तो समाज की दशा और दिशा दोनों में एक अद्भुत और पवित्र परिवर्तन आ जाएगा।
💡 सुंदर साथ जी से विशेष प्रार्थना:मंत्र के नाम पर होने वाले व्यर्थ के विवादों को छोड़कर, वाणी के अगाध प्रेम-सागर में डुबकी लगाएं। खिलवत, परिक्रमा, सागर और श्रृंगार की वाणी का चिंतन करें और अपने हृदय में नख से शिख तक श्री युगल स्वरूप की छवि को बसाएं।
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