Перейти к содержимому

लाल किताब के अनुशार कुंडली में मंगल बद और उसके फल #jyotish #vedicastrology

S Kumar Jyotish

0:00 / 0:00

लाल किताब के अनुशार कुंडली में मंगल बद और उसके फल #jyotish #vedicastrology

131 просмотр · 2 месяца назад
S Kumar Jyotish
25,2 тыс. подписчиков
131 просмотр · 2 месяца назад
लाल किताब के अनुशार कुंडली में मंगल बद और उसके फल #jyotish #vedicastrology लाल किताब में मंगल बद (अशुभ या मंदा मंगल) एक महत्वपूर्ण अवधारणा है। जब मंगल अपनी शुभता खोकर नकारात्मक प्रभाव देने लगता है, तो उसे 'मंगल बद' कहा जाता है। मंगल बद कब और किन ग्रहों की वजह से होता है? कुंडली के विशेष घरों में होना: यदि मंगल कुंडली के चौथे (4th) या आठवें (8th) भाव में अकेला बैठा हो, तो वह 'बद' माना जाता है। शत्रु ग्रहों का साथ या दृष्टि: * जब मंगल बुध या केतु के साथ बैठा हो या बुध केतु उसे देख रहा हो। (बुध केतु और मंगल मिलकर 'मंगल बद' बनाते हैं)। यदि सूर्य और शनि एक साथ किसी भी घर में बैठे हों, तो उनका संयुक्त प्रभाव भी मंगल को बद कर देता है। स्वयं के कर्म (लाल किताब के अनुसार): भाई से विवाद करना, बड़े भाई का अपमान करना या दक्षिण मुखी घर में रहने से भी मंगल बद होता है। मंगल बद के लक्षण और फल जब मंगल बद होता है, तो व्यक्ति के जीवन में निम्नलिखित अशुभ फल देखने को मिलते हैं: रक्त और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं: खून से जुड़ी बीमारियां, उच्च रक्तचाप (BP) या शरीर के गुप्त अंगों में तकलीफ होना। पारिवारिक कष्ट: संतान उत्पत्ति में बाधा आना या बड़े भाई के जीवन में भारी कष्ट व आर्थिक तंगी रहना। अचानक दुर्घटनाएं: अकारण गुस्सा आना, वाद-विवाद, कोर्ट-कचहरी के मामले और बार-बार दुर्घटना (Accidents) या चोट लगने का भय रहना। आर्थिक नुकसान: जमा पूंजी का अचानक नष्ट हो जाना और व्यापार में बार-बार घाटा होना। #astrology #jyotishvidhy #horoschopaihor oschopai #jyotishman #horoschopai #jyotishman #zodiachsigns #jyotishjosh #palmistry #mantrajyotish # vaidik jyotishi #ज्योतिष #zodiacsigns #jyotish