माँ ही बंधन, माँ ही मोक्ष! || आचार्य प्रशांत, दुर्गा सप्तशती, प्रथम चरित्र (2023)
शास्त्रज्ञान
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माँ ही बंधन, माँ ही मोक्ष! || आचार्य प्रशांत, दुर्गा सप्तशती, प्रथम चरित्र (2023)
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वीडियो जानकारी: 13.10.23, नवरात्रि सत्र, ग्रेटर नोएडा
Title : माँ ही बंधन, माँ ही मोक्ष! || आचार्य प्रशांत, दुर्गा सप्तशती, प्रथम चरित्र (2023)
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विवरण:
इस वीडियो में आचार्य जी नवरात्रि के उपलक्ष्य में दुर्गा सप्तशती के प्रथम चरित्र पर चर्चा कर रहे हैं।
वे महाकाली, मधु-कैटभ और महर्षि मार्कण्डेय की कथा के माध्यम से बताते हैं कि माया (प्रकृति) ही बंधन भी है और मोक्ष भी। राजा सुरथ और व्यापारी समाधि की कहानी दिखाती है कि दुख का कारण बाहर नहीं, बल्कि हमारे भीतर के असुर हैं—देह से उत्पन्न वृत्तियाँ, भावनाएँ और मोह।
आचार्य जी स्पष्ट करते हैं कि स्तुति केवल गीत गाना नहीं, बल्कि प्रकृति को दोष न देना, अपनी भूल देखना और कृतज्ञ बनना है। माँ को समझना और अपने अहंकार को पहचान लेना ही मुक्ति का मार्ग है। नवरात्रि के दौरान वे दर्शकों से आग्रह करते हैं कि प्रतिदिन अपने मोह, क्रोध, काम और अहंकार को देखें और माया के प्रति कृतज्ञ रहें—तभी माँ मोक्षदायिनी बनेगी।
🎧 सुनिए #आचार्यप्रशांत को Spotify पर:
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संगीत: मिलिंद दाते
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