रोटू गाँव | जम्भेश्वर भगवान | ने 3700 पेड़ लगाए थे / Kuldeep Kamboj
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रोटू गाँव | जम्भेश्वर भगवान | ने 3700 पेड़ लगाए थे / Kuldeep Kamboj
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रोटू गाँव : जम्भेश्वर भगवान ने 3700 पेड़ लगाए थे खेजड़ी को काटना तो दूर की बात छंगाई भी नही की जाती।
यह नागौर से लगभग 30 कि.मी. पूर्वोत्तर में है। वर्तमान में यहाँ एक भव्य मन्दिर बना हुआ है, जिसमें एक खांडा जो दूदोजी को भेण्ट किया गया था तथा गुरुजी के पत्थर पर अंकित चरण चिन्ह मौजुद हैं।
रोटू का सर्वाधिक महत्त्व इस बात के लिये है कि यहाँ श्री गुरु जम्भेश्वर जी ने अक्षय तृतीया वि. सं. 1572 (1515 ई.) को जोखे भादू की बेटी उमा ( नौरंगी ) को भात (मायरा) भरा था।
कहते है कि श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान भक्तिनी उमा बाई का मायरा भरने के लिए रोटू गांव में पहुँचे तथा उमा बाई के घर के सामने जमीन पर पड़ी पत्थर की शिला पर चरण रखा तो वह पत्थर पिघल गया तथा पत्थर पर भगवान के चरण का चिन्ह उत्कीर्ण हो गया। गुरु जम्भेश्वर जी के पदचिन्ह पत्थर पर आज भी यहाँ मौजूद हैं।
गुरु जम्भेश्वर ने यहाँ खेजड़ियों का बाग लगा दिया था । यह बाग आज भी यहाँ मौजूद है। यह भी कहा जाता है कि यहाँ की चिड़ियाँ या अन्य पक्षी यहाँ की फसलों से दाने नहीं चुगते । वे यहां खेजड़ियों पर बैठकर विश्राम करते हैं ।
वि. सं. 1572 (1515 ई.) में अर्थात पांच सौ वर्ष पहले यहां जम्भेश्वर भगवान ने 3700 पेड़ लगाए थे जो आज वट वृक्ष के समान हो गए। और पर्यावरण सरंक्षण के अद्भुत कार्य के माइल स्टोन बनकर खड़े है। इस गाँव में खेजड़ी को काटना तो दूर की बात है छंगाई भी नही की जाती।
पर्यावरण सरंक्षण की वजह ही गांव में आज हजारो की तादात में चिंकारा हिरण और कृष्ण मृग गांव में खुलेआम घूमते नजर आ जाते है, ग्रामीणों के अनुसार गांव के आसपास 6 हजार से ज्यादा हिरण यहां खुलेआम विचरण करते हैं।
यह गांव जीव दया और प्रेम की जीवंत कहानी है गांव में हिरण आखेट निषेध है, और कंजर्वेशन क्षेत्र भी घोषित किया जा चुका है।
अगर गांव के आसपास में हिरणों का कोई शिकार कर ले या कोशिश भी की जाती है तो गांव के बुजुर्ग, युवा और महिलाएं सब जीव को बचाने के लिए एक स्वर में खड़े हो जाते है। ग्रामीण कहते है हम अपने बच्चों की तरह जानवरो को पालते है हिरणों के बच्चों को औरते अपने बच्चों की तरह दूध पिलाती है। तो उसको मारने कैसे देंगे।
रोटू धाम बिश्नोई समाज के अष्ट धामों में से एक धाम है।
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Voice Over Writer :- Sunder Musafir
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