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अब मैं‌ नई दुनिया बसाऊंगा

PKC_PRODUCTION

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अब मैं‌ नई दुनिया बसाऊंगा

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(प्रस्तावना — धीमी, दर्दभरी आवाज़ में) छह संतानों में सबसे बड़ा था मैं, हर दर्द में माँ-बाप के खड़ा था मैं। सबसे आगे था पढ़ाई में भी, फिर भी क्यों सबसे अकेला पड़ा था मैं? जिस घर को अपना संसार समझा, उसी घर में पराया कहलाया। जिस प्यार के लिए तरसता रहा, वही प्यार मुझे कभी मिल न पाया। (मुखड़ा — दिल को छू लेने वाला) अब मैं नई दुनिया बसाऊँगा, अपनी तकदीर खुद बनाऊँगा। जो सपने बचपन में टूट गए, उन्हें अपने बच्चे के लिए सजाऊँगा। बहुत सह लिया, अब और नहीं, आँखों में आँसू का दौर नहीं। बीती बातों को भूलकर अब, अपनों संग नया जीवन बिताऊँगा। (अंतरा 1 — बचपन का दर्द) गरीबी कहकर ख्वाहिशें मेरी, हर बार दबाई जाती थीं। मेरी छोटी-छोटी खुशियाँ भी, मजबूरी में गिनवाई जाती थीं। भाई-बहनों के बीच न जाने, किसने ये दीवार बनाई थी। गलतफहमियों के बीज बोकर, किस्मत मेरी क्यों आजमाई थी? मैं चुपचाप घुटता रहता था, अपने आँसू खुद पीता था। सबके आगे हँसता रहता, अकेले में दर्द से जीता था। (मुखड़ा) अब मैं नई दुनिया बसाऊँगा, अपनी तकदीर खुद बनाऊँगा। जो प्यार कभी मुझको न मिला, अपने परिवार को वो प्यार दिलाऊँगा। (अंतरा 2 — शादी और पत्नी का दर्द) फिर उम्र ने दस्तक दे डाली, मैंने अपना जीवनसाथी चुना। सोचा था अब खुशियाँ आएँगी, सपनों से घर का आँगन बुना। पर मेरे हिस्से का भेदभाव, उसकी जिंदगी तक जा पहुँचा। जिसे अपना सुख-दुख देना था, उसका भी मन दर्द से भर बैठा। मैंने हर आँसू को सहलाया, हर मुश्किल में साथ निभाया। सोचा था एक दिन बदलेंगे, इस उम्मीद ने मुझे समझाया। (अंतरा 3 — अपने बच्चे के लिए दर्द) फिर मेरे आँगन में फूल खिला, नन्हा-सा मेरा बच्चा आया। सोचा था अब प्रेम बरसेगा, खुशियों से घर भर जाएगा। लेकिन उसकी मासूम दुनिया में, भेदभाव का साया आया। जिस दर्द को मैं सहता आया, उसने फिर दिल को तड़पाया। अपने हिस्से का दर्द सहूँगा, पर बच्चे का बचपन बचाऊँगा। जो घाव मेरे मन में रह गए, उनसे उसको दूर रख पाऊँगा। (ब्रिज — टूटती उम्मीदों की आवाज़) अब सुधरेंगे, कल सुधरेंगे, कहते-कहते साल गए। आँखों में जो सपने थे, वो आँसू बनकर ढल गए। उम्मीदों का दीप जलाया, हर बार उसे बुझते देखा। रिश्तों को बचाने की खातिर, खुद को ही टूटते देखा। अब शिकायत भी कम कर दी है, अपेक्षाओं को विराम दिया। रिश्ता बस औपचारिक रखा, दिल को थोड़ा आराम दिया। (अंतिम अंतरा — नई जिंदगी का संकल्प) अब अपनी पत्नी, अपने बच्चे संग, नई राह पर चलना है। बीती बातों के अँधियारों से, आगे निकलकर बढ़ना है। नफरत लेकर नहीं चलूँगा, बस दूरी का सम्मान रखूँगा। जो कल बीता, बीत गया अब, नए कल का अरमान रखूँगा। हे भगवान! इतनी कृपा करना, मेरे घर में खुशियाँ भरना। मेरे बच्चे को वो प्यार मिले, जिसके लिए तरसा था बचपन मेरा। (समापन — भावुक, आशावादी आवाज़ में) अब मैं नई दुनिया बसाऊँगा, अपनी मेहनत से घर सजाऊँगा। बीते कल की पीड़ा भूलकर, अपने परिवार संग मुस्कुराऊँगा। टूटे सपनों को फिर जोड़ूँगा, अपने जीवन को नया मोड़ दूँगा। हे प्रभु! बस इतनी अभिलाषा है, मेरे जीवन में सुख की आशा है। मैं हारा नहीं, बस बदल रहा हूँ, अपने परिवार के लिए सँभल रहा हूँ। पुरानी पीड़ा को पीछे छोड़कर, एक नई जिंदगी की ओर चल रहा हूँ। ❤️