केवट ने श्रीराम के चरण क्यों धोए? ⛵ | राम-केवट की भावुक कथा | Ramayan Katha 🚩
Sanatan Katha sagar
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केवट ने श्रीराम के चरण क्यों धोए? ⛵ | राम-केवट की भावुक कथा | Ramayan Katha 🚩
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क्या आप जानते हैं — गंगा के किनारे एक केवट ने भगवान श्रीराम को अपनी नाव में बिठाने से इनकार कर दिया था? उसकी एक ही शर्त थी — "पहले चरण धोने दो!" अहल्या की शिला राम के चरणों से स्त्री बन गई थी — तो केवट डरा कि उसकी लकड़ी की नाव भी स्त्री बन गई तो उसकी रोज़ी छिन जाएगी! राम मुस्कुराए और चरण धोने की अनुमति दे दी। नाव पार हुई, और उतराई के समय केवट ने कहा — "हम दोनों एक ही पेशे के हैं — मैं नदी पार उतारता हूँ, आप भव-सागर पार उतारते हो। एक केवट दूसरे केवट से उतराई नहीं लेता!" जानिए रामायण की सबसे भावुक कथा — भक्ति, सेवा और प्रेम की अमर गाथा।
🙏 सनातन कथा सागर में आपका स्वागत है — सनातन धर्म की पावन कथाएँ, रोज़ शाम 7 बजे।
📜 स्रोत: रामायण, अयोध्या कांड (श्रृंगवेरपुर, गंगा पार); चरण-धोने का प्रसंग तुलसीदास/परंपरा की प्रिय कथा है; उतराई में सीता की अँगूठी परंपरा के अनुसार।
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