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84 लाख योनियों में भटकने के बाद मिला मनुष्य शरीर, इसे व्यर्थ ना गवाए | स्वामी हरिमोहन बाबा

Gurudev Bhakti Sadhna и Gurudev Bhakti Bhajan

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84 लाख योनियों में भटकने के बाद मिला मनुष्य शरीर, इसे व्यर्थ ना गवाए | स्वामी हरिमोहन बाबा

1 284 просмотра · 4 дн. назад
Gurudev Bhakti Sadhna и Gurudev Bhakti Bhajan
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84 लाख योनियों में भटकने के बाद मनुष्य शरीर की प्राप्ति होती है। यह मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ और अनमोल है। हमें इस जीवन को केवल संसार के मोह-माया और भौतिक सुखों में व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए, बल्कि अपने वास्तविक उद्देश्य को समझकर गुरु भक्ति, सत्संग और परमात्मा की साधना में लगाना चाहिए। इस वीडियो में स्वामी हरिमोहन बाबा मनुष्य शरीर की महिमा और उसके महत्व को सरल एवं प्रभावशाली तरीके से समझाते हैं। बाबा बताते हैं कि मनुष्य जीवन हमें आत्मकल्याण और परमात्मा की प्राप्ति के लिए मिला है, इसलिए समय रहते हमें चेतना चाहिए और इस अनमोल अवसर का सदुपयोग करना चाहिए। 🙏 संत सदगुरु महर्षि मेंही परमहंस जी महाराज के आध्यात्मिक विचारों एवं संतमत की साधना से प्रेरणा लेकर अपने जीवन को सार्थक बनाने का प्रयास करें। वीडियो अच्छा लगे तो Like 👍 | Share 🔄 | Subscribe 🔔 जरूर करें। #स्वामीहरिमोहनबाबा #हरिमोहनबाबा #संतमत #महर्षिमेंही #मनुष्यशरीर #84लाखयोनि #सत्संग #गुरुभक्ति 🏷️ YouTube Tags स्वामी हरिमोहन बाबा, हरिमोहन बाबा, हरिमोहन बाबा सत्संग, Harimohan Baba, Swami Harimohan Baba, Harimohan Baba Satsang, 84 लाख योनि, 84 लाख योनियों में भटकने के बाद, मनुष्य शरीर, मनुष्य जीवन, मनुष्य शरीर की महिमा, मनुष्य शरीर क्यों मिला, मानव जीवन, मानव शरीर, जीवन का उद्देश्य, संतमत सत्संग, संतमत भजन, संतमत, महर्षि मेंही, महर्षि मेंही परमहंस जी महाराज, संत सदगुरु महर्षि मेंही, गुरु भक्ति, गुरु का ज्ञान, सत्संग, आध्यात्मिक सत्संग, आत्मज्ञान, परमात्मा की भक्ति, भक्ति सत्संग, चेतावनी सत्संग, हरिमोहन बाबा का प्रवचन, हरिमोहन बाबा का सत्संग, Harimohan Baba Pravachan, Santmat Satsang, Maharshi Mehi Satsang, मनुष्य जीवन व्यर्थ ना गवाएं