जब न धरती थी, न आकाश था, तब क्या था? निर्गुण का सबसे बड़ा रहस्य | संत रविदास कथा
Teakchand Ravidas ji
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जब न धरती थी, न आकाश था, तब क्या था? निर्गुण का सबसे बड़ा रहस्य | संत रविदास कथा
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Teakchand Ravidas ji
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जब न धरती थी, न आकाश था, तब क्या था? निर्गुण का सबसे बड़ा रहस्य | संत रविदास कथा
क्या आपने कभी सोचा है कि जब न धरती थी, न आकाश था, न दिन था, न रात थी और न ही इस संसार का कोई अस्तित्व था, तब क्या विद्यमान था?
आखिर सृष्टि की उत्पत्ति से पहले कौन-सा परम सत्य था? निर्गुण किसे कहते हैं? क्या वह केवल शून्य है या उस शून्य से भी परे कोई अखंड परम तत्त्व है?
इस विशेष आध्यात्मिक पॉडकास्ट में संत रविदास महाराज की निर्गुण विचारधारा के माध्यम से इन गूढ़ प्रश्नों को समझने का प्रयास किया गया है। जानिए निर्गुण और सगुण का वास्तविक अर्थ, सृष्टि के प्रकट होने का रहस्य और उस परम सत्य की महिमा, जिसे सामान्य बुद्धि और कल्पना से पूरी तरह समझ पाना आसान नहीं है।
यह कथा केवल सुनने के लिए नहीं, बल्कि मन को ठहराकर आत्मचिंतन करने और सतगुरु की वाणी के भाव को समझने का एक अवसर है।
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सतनाम जी महाराज।
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