महामना मालवीयः Class 12 Sanskrit | UP Board 2027 Chapter Animated
ATHARV и GYANKUL ACADEMY
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महामना मालवीयः Class 12 Sanskrit | UP Board 2027 Chapter Animated
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महामना मालवीयः Class 12 Sanskrit | UP Board Chapter Explanation (Animated) ✅
1.*अनुवाद* : महामना मदनमोहन मालवीय का जन्म प्रयागराज (इलाहाबाद) के एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था। इनके पिता पण्डित व्रजनाथ मालवीय संस्कृत के सम्माननीय विद्वान् थे। इन्होंने प्रयाग में ही संस्कृत पाठशाला, राजकीय विद्यालय तथा म्योर सेण्ट्रल महाविद्यालय में शिक्षा प्राप्त कर यहीं राजकीय विद्यालय में अध्यापन प्रारम्भकिया। युवा मालवीय ने अपने प्रभावपूर्ण भाषण से लोगों का मन मोह लिया। अतः इनके शुभचिन्तकों ने इन्हें अधिवक्ता की पदवी प्राप्त कर राष्ट्र की श्रेष्ठतम सेवा करने के लिए प्रेरित किया। उसी के अनुसार इन्होंने कानून की परीक्षा उत्तीर्ण कर प्रयाग स्थित उच्च न्यायालय में वकालत प्रारम्भ कर दी। विधि के उत्कृष्ट ज्ञान, मृदु वार्तालाप तथा अपने उदार व्यवहार से शीघ्र ही ये मित्रों एवं न्यायाधीशों के सम्मान के पात्र बन गए।
2. अनुवाद : महापुरुष सांसारिक प्रलोभनों में फँसकर निश्चित लक्ष्य सेकदापि विचलित नहीं होते। राष्ट्रसेवा में लीन यह युवक उच्च न्यायालय की सीमा में नहीं बंध सका। पण्डित मोतीलाल नेहरू, लाला लाजपतराय जैसे अन्य राष्ट्रनायकों सहित ये भी देश के स्वतन्त्रता संग्राम में कूद पड़े। दिल्ली में कांग्रेस के तेईसवें अधिवेशन में इन्होंने अध्यक्ष पद को सुशोभित किया। रोलट एक्ट के विरोध में इनके ओजस्वी भाषण को सुनकर अंग्रेज शासक भयभीत हो उठे। कई बार जेल जाने के पश्चात् भी इस वीर ने राष्ट्रसेवा-व्रत का त्याग नहीं किया।
3. अनुवाद : इन्हें हिन्दी, संस्कृत एवं अंग्रेजी भाषाओं पर समान अधिकार था। इन्होंने हिन्दी, हिन्दू एवं हिन्दुस्तान के उत्थान के लिए निरन्तर प्रयत्न किया। शिक्षा से ही राष्ट्र तथा समाज में नव-प्रकाश का उदय होता है, इसलिए श्री मालवीय जी ने वाराणसी में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना की। इसके निर्माण के लिए इन्होंने लोगों से धन माँगा। इस महाज्ञान-यज्ञ में। लोगों ने इन्हें पर्याप्त धन दिया। उससे निर्मित यह विशाल विश्वविद्यालय भारतीयों की दानशीलता तथा श्री मालवीय जी के यश की प्रतिमूर्ति के रूप में शोभायमान है। विद्वानों में श्रेष्ठ मालवीय जी ने यह दिखा दिया कि साधारण स्थिति वाला भी महान् उत्साह, विचारशीलता तथा पुरुषार्थ से असाधारण कार्य करने में सक्षम होता है, इसलिए लोगों ने इन्हें 'महामना' उपाधि से सम्बोधित करना आरम्भ कर दिया।
4. अनुवाद : महामना विद्वान् वक्ता, धार्मिक नेता एवं कुशल पत्रकार थे, किन्तु जनसेवा ही इनका सर्वोच्च गुण था। ये जहाँ कहीं भी लोगों को दुःखी और पीड़ित देखते, वहाँ शीघ्र उपस्थित होकर सब प्रकार की सहायता करते थे। प्राणियों की सेवा ही इनका स्वभाव था। आज हमारे बीच अनुपस्थित होकर भी महामना मालवीय अमूर्तरूप से अपने यश का प्रकाश बाँटते हुए गहन अन्धकार में डूबे हुए लोगों को सन्मार्ग दिखाते हुए स्थान-स्थान पर जन-जन में उपस्थित हैं।
जो लोग अपना जीवन जनकल्याण के लिए समर्पित कर देते हैं, उनकी कीर्ति मृत्यु के बाद भी जीवित रहती है।
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