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प्यारी जब जब देखू तेरो मुख।

Prem Saheli

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प्यारी जब जब देखू तेरो मुख।

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Prem Saheli
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गोरे लाल कुंज से पद को आनंद। स्वर - गोरे लाल महाराज प्यारी जू जब जब देखौं तेरो मुख तब तब नयों नयों लागत। ऐसे भ्रम होत मैं कहूँ देखि न री दुति कौं दुति लेखनी न कागत॥ कोटि चन्द्र तैं कहाँ दुराये री नये नये रागत। श्री हरिदास के स्वामी स्याम कहत काम की सांति न होई न होई तृप्ति रहौं निसी दिन जागत॥ 🌺🌺 स्वामी श्रीहरिदास जी महाराज , केलिमाल 🌺🌺 रसमय कुंज है । प्रिया जी पिय पर अतिप्रसन्न हैं । लाल जी प्रिय जी से कह रहे हैं - प्यारी जी जब जब आप के मुखकमल को देखता हूँ तब तब नित नवीन लगता हैं और मेरी केलि विलसने की चाह बढ़ने लगती है । भ्रम होने लगता है कि यह शोभा कभी देखी ही नहीं । मेरे पास आप की सुन्दर छवि की शोभा का लिखने के लिए न कलम है न दवात है और न कागज ही है । हरिदास के स्वामी श्याम कह रहे हैं - हे श्यामा जी । मैं आप के वश में हूँ । आप के प्रेम के वश में हूँ यानी पूरी तरह से आप के अधीन हूँ । आप की कृपा अनिवार्य है । कामना की शान्ति आप ही कर सकती है । आप का ही ध्यान करता रहता हूँ । श्री राधे श्री राधे श्री राधे 🙏 ✨✨✨✨✨✨✨